आज 7 नवंबर 2026 को छोटी दिवाली मनाई जा रही है. इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर उसके बंदीगृह में कैद 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया था. इसी वजह से यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. छोटी दिवाली पर सुबह औषधीय स्नान और शाम को दीपदान करने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन 14 दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.
छोटी दिवाली पर 14 दीपक जलाने की क्या है परंपरा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली की शाम 14 दीपक जलाने चाहिए. इनमें एक विशेष दीपक यमराज के नाम से जलाया जाता है. यह दीपक आटे से बनाया जाता है और इसमें चार बत्तियां लगाई जाती हैं. इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है. इसे यम दीपदान कहा जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर अकाल मृत्यु का संकट नहीं आता और यमराज की कृपा बनी रहती है.
बाकी 13 दीपक घर के अलग-अलग स्थानों पर रखे जाते हैं. इनमें मुख्य द्वार, घर का मंदिर, तुलसी का पौधा, पीपल का पेड़, रसोईघर, आंगन, सीढ़ियां, शौचालय के पास और पानी की निकासी वाले स्थान शामिल हैं. घर के अंधेरे कोनों में भी दीपक जलाने की परंपरा है.
नरक चतुर्दशी पर औषधीय स्नान का क्या है महत्व?
प्रयागराज के पंडित धनंजय शुक्ला अवि जी के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है. सुबह के जरूरी काम पूरे करने के बाद शरीर पर तिल के तेल से मालिश करनी चाहिए. इसके बाद लौकी और अपामार्ग नामक पवित्र जड़ी-बूटी को सिर के चारों ओर सात बार घुमाया जाता है. इसे शुद्धि की एक धार्मिक क्रिया माना जाता है. इसके बाद इन वस्तुओं को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर फेंककर स्नान किया जाता है.
धार्मिक मान्यता है कि इस विधि से व्यक्ति को नरक के भय से मुक्ति मिलती है और बुरी आदतों को छोड़ने की प्रेरणा मिलती है. सूर्योदय से पहले स्नान करने को भी विशेष फलदायी माना गया है.
छोटी दिवाली पर कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती?
पंडित धनंजय शुक्ला अवि जी के अनुसार, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान हनुमान का जन्म प्रदोष काल में मेष लग्न के दौरान हुआ था. इसी वजह से इस दिन हनुमान जयंती मनाने की भी परंपरा है. इस वर्ष 7 नवंबर को प्रदोष काल में मेष लग्न शाम 4:25 बजे से 6:05 बजे तक रहेगा. इसी समय मंदिरों और घरों में भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना और जयंती उत्सव मनाया जाएगा.
छोटी दिवाली 2026 पर क्या करें?
- सूर्योदय से पहले उठकर तिल के तेल से मालिश करें और उबटन लगाकर स्नान करें.
- स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज का तर्पण या प्रार्थना करें.
- भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें और नरकासुर वध की कथा याद करें.
- शाम को प्रदोष काल में मुख्य द्वार पर चार बत्तियों वाला यम दीपक जलाएं.
- घर के मंदिर, रसोई, तुलसी के पौधे और अंधेरे स्थानों पर दीपक रखें.
- लक्ष्मी पूजा से पहले घर को मिट्टी के दीपकों से रोशन करें.
- जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और जरूरी सामान दान करें.
- अपने पूर्वजों को याद कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करें.
छोटी दिवाली पर क्या नहीं करना चाहिए? - सूर्योदय के बाद देर तक सोने से बचें. इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने की परंपरा है.
- यम दीपक को जानबूझकर न बुझाएं और न ही उसके ऊपर से गुजरें.
- यम दीपक को दक्षिण दिशा के अलावा किसी दूसरी दिशा में न रखें.
- इस्तेमाल किए गए दीपकों को सीधे कूड़ेदान में न डालें. ठंडा होने के बाद उन्हें मिट्टी में दबाएं या साफ करके दोबारा इस्तेमाल के लिए रखें.
- जलते दीपकों के पास पर्दे, कपड़े या आग पकड़ने वाली चीजें न रखें.
- बच्चों को दीपक जलाते या पटाखे चलाते समय अकेला न छोड़ें.
- अधिक पटाखे जलाने से बचें और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से दूर रहें.
छोटी दिवाली का पर्व केवल दीपक जलाने तक सीमित नहीं है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत, भक्ति, स्वच्छता और सकारात्मकता का संदेश देता है. इस दिन परिवार के साथ मिलकर पूजा-पाठ करें और जरूरतमंदों की मदद करके त्योहार की खुशियां बांटें.
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