दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा में फूलों का विशेष महत्व माना जाता है. भक्त देवी को ताजे और सुगंधित पुष्प अर्पित करते हैं. ज्योतिष और वास्तु की मान्यताओं में अलग-अलग राशियों के लिए खास रंग और फूल सुझाए जाते हैं. प्रयागराज के पंडित धनंजय शुक्ला अवि जी का कहना है कि मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए फूल बताए गए हैं.
मेष से कर्क राशि तक के फूल
मेष राशि वालों के लिए लाल गुलाब या गुड़हल सुझाया गया है. मान्यता में मेष का स्वामी मंगल है और लाल रंग उससे जुड़ा माना जाता है. वृषभ राशि के जातक सफेद कमल या मोगरा अर्पित कर सकते हैं. इस राशि का संबंध शुक्र से माना जाता है, इसलिए सफेद और सुगंधित फूल बताए गए हैं.
मिथुन राशि के लिए हरी दूर्वा के साथ पीले या हरे फूल सुझाए गए हैं. कर्क राशि के जातक मां लक्ष्मी के चरणों में सफेद कमल चढ़ा सकते हैं. इन सुझावों का आधार ग्रहों के पारंपरिक संबंध और रंगों की प्रतीकात्मकता है.
सिंह से वृश्चिक राशि के लिए फूल
सिंह राशि के लोगों को लाल कनेर या लाल कमल अर्पित करने की सलाह दी गई है. ज्योतिष में सिंह का स्वामी सूर्य माना जाता है. कन्या राशि के लिए कमलगट्टा या पारिजात बताया गया है. तुला राशि के जातक जूही का फूल चढ़ा सकते हैं. तुला का स्वामी शुक्र माना जाता है और जूही की सुगंध को इससे जोड़ा गया है.
वृश्चिक राशि के लिए गहरे लाल रंग के फूल सुझाए गए हैं. रिपोर्ट में लाल फूलों को लक्ष्मी पूजा के लिए उपयुक्त बताया गया है. हालांकि, किसी फूल को चढ़ाने से कर्ज खत्म होने या अचानक धन मिलने का दावा प्रमाणित तथ्य नहीं है.
धनु से मीन राशि तक के विकल्प
धनु राशि वालों को पीला गेंदे का फूल अर्पित करने की सलाह है. इस राशि का संबंध गुरु ग्रह से माना जाता है. मकर राशि के लिए नीला अपराजिता फूल सुझाया गया है. कुंभ राशि के लोग भी नीले फूल चढ़ा सकते हैं. मीन राशि के लिए पीले फूल बताए गए हैं. इन सुझावों में ग्रहों के पारंपरिक स्वभाव और रंगों के धार्मिक अर्थ को आधार बनाया गया है.
लक्ष्मी पूजा में फूल चढ़ाते समय सावधानी
प्रयागराज के पंडित धनंजय शुक्ला अवि जी के अनुसार, पूजा में जमीन पर गिरे, मुरझाए या बासी फूल नहीं चढ़ाने चाहिए. पारिजात को इस मान्यता में अपवाद बताया गया है. पूजा के अगले दिन अर्पित फूलों को सम्मानपूर्वक हटाने की सलाह है. उन्हें सुखाकर लाल रेशमी कपड़े में बांधकर तिजोरी या अलमारी में रखने का पारंपरिक उपाय भी बताया गया है.
स्वच्छता और श्रद्धा को दें प्राथमिकता
फूल ताजे रखें और स्थानीय परंपरा का सम्मान करें. कोई खास फूल न मिले तो पूजा रोकने की जरूरत नहीं है. श्रद्धा और स्वच्छता को प्राथमिकता दें.
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