Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के हर दिन देवी के अलग-अलग रूप को समर्पित होता है. इस दौरान भक्त व्रत रखने के साथ पूजा, आरती और मंत्र जाप करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि देवी के स्वरूप का ध्यान करके मंत्र का जाप करने से मन एकाग्र होता है और भक्त को आध्यात्मिक शांति मिलती है.
अगर आप नवरात्रि के नौ दिनों में रोज अलग मंत्र का जाप करना चाहते हैं, तो प्रत्येक दिन उस दिन पूजी जाने वाली देवी के नाम से जुड़े मंत्र का जाप कर सकते हैं. मंत्र जाप श्रद्धा और अपनी सुविधा के अनुसार किया जा सकता है.
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पहला दिन: मां शैलपुत्री का मंत्र
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है.
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
इस मंत्र का जाप करते समय मां शैलपुत्री का ध्यान किया जा सकता है. सुबह स्नान के बाद पूजा करके श्रद्धानुसार मंत्र का जाप करें.
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. उन्हें तप और संयम का स्वरूप माना जाता है.
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
पूजा के दौरान मां का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार जाप की संख्या तय कर सकते हैं.
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा का मंत्र
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है. उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।
मंत्र जाप से पहले दीपक जलाकर मां की पूजा करें और फिर शांत मन से मंत्र का जाप करें.
चौथा दिन: मां कूष्मांडा का मंत्र
चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता में उन्हें सृष्टि की आदि शक्ति के रूप में माना जाता है.
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
मां कूष्मांडा की पूजा के बाद इस मंत्र का जाप किया जा सकता है. मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और श्रद्धा के साथ करना बेहतर माना जाता है.
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता का मंत्र
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है. उन्हें भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता के रूप में पूजा जाता है.
ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः।
इस मंत्र का जाप करते समय मां स्कंदमाता का ध्यान करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार मां की पूजा से भक्तों को शांति और मातृ कृपा का भाव मिलता है.
छठा दिन: मां कात्यायनी का मंत्र
छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है. उन्हें शक्ति और साहस से जुड़े देवी स्वरूप के रूप में पूजा जाता है.
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
पूजा के बाद इस मंत्र का जाप किया जा सकता है. जाप के दौरान मन को शांत रखने और देवी के स्वरूप का ध्यान करने की कोशिश करें.
सातवां दिन: मां कालरात्रि का मंत्र
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. उनका स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन भक्त उन्हें शुभ फल देने वाली देवी के रूप में भी पूजते हैं.
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
मां कालरात्रि की पूजा करते समय श्रद्धा के साथ इस मंत्र का जाप किया जा सकता है. पूजा के दौरान दीपक और अन्य सामग्री रखते समय सुरक्षा का ध्यान रखें.
आठवां दिन: मां महागौरी का मंत्र
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. धार्मिक परंपरा में उनका स्वरूप शांति और पवित्रता से जोड़ा जाता है.
ॐ देवी महागौर्यै नमः।
अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा के बाद इस मंत्र का जाप किया जा सकता है. कई घरों में इसी दिन कन्या पूजन और हवन की भी परंपरा है.
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री का मंत्र
नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. उन्हें नवरात्रि के नौवें स्वरूप के रूप में पूजा जाता है.
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
नवमी की पूजा में मां सिद्धिदात्री का ध्यान करके इस मंत्र का जाप किया जा सकता है. इसके बाद मां की आरती और प्रसाद अर्पित करने की परंपरा है.
मंत्र जाप करते समय इन बातों का रखें ध्यान
मंत्र जाप के लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति एक ही संख्या में जाप करे. अपनी श्रद्धा, समय और सुविधा के अनुसार जाप किया जा सकता है. पूजा के दौरान साफ स्थान पर बैठकर मन को शांत रखना और मंत्र का सही उच्चारण करने का प्रयास करना महत्वपूर्ण है.
नवरात्रि में पूजा की विधि और मंत्रों के उच्चारण में क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर भी हो सकता है. इसलिए यदि आपके परिवार में किसी विशेष मंत्र या पूजा विधि का पालन होता है, तो उसे प्राथमिकता दी जा सकती है.
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मंत्र जाप को आध्यात्मिक साधना के रूप में करें और इसके परिणामों को लेकर निश्चित या चमत्कारिक दावे करने से बचें. श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक भाव के साथ की गई पूजा ही इस पर्व का मुख्य उद्देश्य है.
नोट: मंत्रों से जुड़े उच्चारण और पूजा-विधि की परंपराएं अलग-अलग संप्रदायों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं. ऊपर दिए गए मंत्र देवी के नौ स्वरूपों के प्रचलित नाम-मंत्र हैं.


