Avadh University: डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या एवं ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी हमीरपुर (हि.प्र.) के मध्य कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के निर्देशन में समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ. ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी (हमीरपुर) व डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या (उ.प्र.) के बीच मौलिक अनुसंधान के लिए बेहतर तालमेल स्थापित हो सके, उसकी शर्तें और उद्देश्य को समक्ष रखते हुए ‘औपचारिक समझौता’ हस्ताक्षरित किया जाना एक महत्त्वपूर्ण कदम है.
ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान की स्थापना सन् 7 अक्तूबर, 2002) में हुई है. शोध संस्थान नेरी (हमीरपुर) इतिहास, पुराकल्प, पुरावृत्त, आख्यान, उपाख्यान, परक्रिया, परकृति, इतिवृत्त, अनुचरित, अनुवंश, कथा, परिकथा, गाथा, अन्वाख्यान, चरित, नाराशंसी, कालविद्, गोत्र-प्रवरकार, राजशान, पुराण और आख्यायिका, आदि इतिहास के महत्त्वपूर्ण 22 प्रकारों पर शोध व लेखन कार्य कर रहा है. शोध व लेखन के साथ-साथ संस्थान में शोध पुस्तकों का प्रकाशन, इतिहास दिवाकर शोध पत्रिका का प्रकाशन, राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियां व परिसंवादों का आयोजन भी किया जाता है.
इतिहास शोध संस्थान नेरी (हमीरपुर) से जुड़े विद्वान विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से संबन्ध रखते हैं. जिनमें युवा शोधार्थियों से लेकर सेवा निवृत विशेषज्ञों तक रुचिकर एवं समर्पित लोग आते हैं. भारतीय इतिहास का भारत की दृष्टि से लिखने के उद्देश्य से किए जा रहे शोध कार्य में इतिहास विषय के अतिरिक्त विभिन्न अन्य जुड़े हुए विषय जिनमें संस्कृत, विज्ञान, भूगोल एवं वाणिज्य इत्यादि को भी शामिल किया गया है. शोध संस्थान शोधार्थियों के लिए पुस्तकालय, परिसर में शोधकार्य की सुविधाएं एवं इनके अतिरिक्त संस्थान परिसर में शोधार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा तथा संकाय सदस्यों के लिए अतिथि गृह की सुविधा भी प्रदान करता है.
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रतिनिधि के तौर पर उपस्थित प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि दोनों संस्थान कौशल-आधारित प्रशिक्षण, शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ व्याख्यान, शैक्षणिक भ्रमण एव संबंधित अकादमिक गतिविधियों के क्षेत्रों में सहयोग विकसित करने का उद्देश्य रखते हैं. दोनों पक्ष समान शैक्षणिक हितों एवं उद्देश्यों से एकजुट हैं तथा परस्पर सहयोग स्थापित करेंगे.यह आपसी सहयोग दोनों संस्थानों की बौद्धिक क्षमताओं एवं शैक्षणिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुगम बनाएगा. दोनों संस्थान इस एमओयू के अंतर्गत यथासंभव शीघ्रता एवं उत्तरदायित्व के साथ प्रासंगिक गतिविधियों एवं समझौतों को कियान्वित करेंगे.
प्रो.अनूप कुमार ने इस समझौता ज्ञापन को एक महत्वपूर्ण उपलब्ध के क्रम में बताया कि इस एमओयू के क्षेत्र में अतिथि व्याख्यान इतिहास, संस्कृति एवं संबंधित विषयों पर आयोजित करने तथा एक-दूसरे के विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग प्रदान करेंगे. अनुसंधान एवं शैक्षणिक सहयोग दोनों पक्ष परस्पर हितों से संबंधित क्षेत्रों में नवीन ज्ञान के सृजन एवं विकास हेतु संयुक्त एवं सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित करने पर सहमत हैं.
भारत के नवाचार मिशन को जानिए, घर बैठे क्विज खेलकर जीत सकते हैं पुरस्कार
दोनों पक्ष ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से छात्र एवं संकाय आदान-प्रदान कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करेंगे. आवश्यकतानुसार संयुक्त पाठ्यक्रमों अथवा सहयोगात्मक शिक्षण कार्यक्रमों का विकास किया जा सकता है. इनसे संबंधित वित्तीय प्रावधान पृथक रूप से निर्धारित किए जाएंगे. एमओयू तब तक प्रभावी एवं वैध रहेगा, जब तक कि दोनों पक्षों की पारस्परिक मे इसे लिखित रूप में समाप्त नहीं किया जाता. इस एमओयू के अंतर्गत प्रथम पक्ष एवं द्वितीय पक्ष स्वतंत्र संस्थान के रूप में कार्य करेंगे.


