अयोध्या: डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को उद्यमिता, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए तीन दिवसीय ‘आइडिया टू इम्पैक्ट स्टूडेंट एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्टार्टअप पिचिंग बूटकैंप’ शुरू हुआ. 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस बूटकैंप में छात्र-छात्राओं को अपने नए विचारों को व्यावसायिक मॉडल में बदलने और उन्हें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करना और उन्हें रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजन करने के लिए प्रेरित करना है.
स्टार्टअप और बिजनेस मॉडल की बारीकियां सीखेंगे विद्यार्थी
बूटकैंप के मुख्य वक्ता प्रबंधन शिक्षा एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम विशेषज्ञ डॉ. विवेक कुमार ने विद्यार्थियों को उद्यमिता, स्टार्टअप रणनीति और व्यावहारिक बिजनेस मॉडल के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी. उच्च शिक्षा, इनक्यूबेशन और संस्थागत नेतृत्व के क्षेत्र में 14 वर्षों से अधिक के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने युवाओं को उद्यमशीलता के अवसर पहचानने और अपने विचारों को धरातल पर उतारने के तरीके बताए.
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी बिजनेस मॉडल कैनवास, आइडिया वैलिडेशन और बिजनेस पिचिंग की बारीकियां सीखेंगे. इससे उन्हें अपने विचारों की उपयोगिता समझने और उन्हें संभावित निवेशकों या अन्य संबंधित पक्षों के सामने प्रभावी तरीके से रखने में मदद मिलेगी.
‘नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनें युवा’
डॉ. लोहिया इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय केवल नौकरी तलाशने का नहीं, बल्कि रोजगार सृजनकर्ता बनने का है. उन्होंने कहा कि युवाओं में उद्यमशील सोच विकसित करना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें देश की अर्थव्यवस्था तथा समाज में सक्रिय योगदान देने के लिए तैयार करते हैं.
किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल भी जरूरी
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. राकेश कुमार ने मुख्य वक्ता डॉ. विवेक कुमार का स्वागत किया और उनके अनुभवों से प्रतिभागियों को परिचित कराया. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है. विचारों को वास्तविक रूप देने के लिए नवाचार, वित्तीय समझ और व्यावहारिक कौशल भी जरूरी हैं.
विश्वविद्यालय की यह पहल परिसर में आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. बूटकैंप के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने नवोन्मेषी विचारों को व्यावसायिक अवसरों में बदलने की समझ विकसित करने का अवसर मिल रहा है.


