Varanasi Textile Park: बनारसी साड़ी और काशी के रेशमी वस्त्र उद्योग को नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. वाराणसी के रमना क्षेत्र में प्रस्तावित पूर्वांचल के पहले संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए 75 एकड़ जमीन हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है. इस परियोजना से पारंपरिक बुनकरों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और वस्त्र उद्योग को उत्पादन से लेकर बाजार तक एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराने की तैयारी है.
राजातालाब क्षेत्र के रमना में बनने वाले इस पार्क के लिए जमीन पहले जलकल विभाग के नाम दर्ज थी. शासन के निर्देश पर इसे अब हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के नाम हस्तांतरित किया गया है. जमीन मिलने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है.
431 कारोबारियों ने दिखाई रुचि, निवेश और रोजगार की उम्मीद
प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क में अब तक 431 कारोबारियों ने अपनी वस्त्र उद्योग इकाइयां स्थापित करने की इच्छा जताई है. इससे परियोजना में निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं. पार्क का उद्देश्य बनारसी वस्त्र उद्योग को आधुनिक तकनीक और बदलते बाजार की जरूरतों से जोड़ना है, ताकि स्थानीय उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सके. परियोजना की योजना बनाते समय वाराणसी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और राष्ट्रीय राजमार्ग से संपर्क को भी ध्यान में रखा गया है. इससे कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन में सुविधा मिलने की उम्मीद है.
24 घंटे बिजली-पानी से लेकर टेस्टिंग लैब तक की सुविधा
टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक इकाइयों के सुचारु संचालन के लिए 24 घंटे बिजली और पानी की आपूर्ति का प्रावधान होगा. इसके साथ ही तैयार माल के सुरक्षित भंडारण के लिए आधुनिक वेयरहाउस, उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए टेस्टिंग लैब और प्रशासनिक भवन बनाया जाएगा. पर्यावरण संरक्षण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज आधारित अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र स्थापित करने की योजना है. इससे औद्योगिक गतिविधियों के दौरान निकलने वाले पानी के प्रबंधन में मदद मिलेगी.
पार्क में बुनकरों और कारीगरों के लिए प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्र भी बनाया जाएगा. यहां पारंपरिक बुनकारी को आधुनिक डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने पर जोर रहेगा. उत्पादों को प्रदर्शित करने और नए खरीदारों तक पहुंच बनाने के लिए प्रदर्शनी केंद्र की सुविधा भी प्रस्तावित है.
छोटे बुनकरों को कम खर्च में काम शुरू करने का मौका
इस परियोजना में छोटे हथकरघा बुनकरों, टेक्सटाइल डिजाइनरों और गारमेंट निर्माण इकाइयों के लिए प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड बनाए जाएंगे. इन शेड में पहले से विकसित औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है, जिससे उद्यमियों को शुरुआती बुनियादी ढांचे पर कम खर्च करना पड़ेगा और वे उत्पादन शुरू करने पर ध्यान दे सकेंगे. इसके अलावा अलग-अलग आकार के औद्योगिक भूखंड भी उपलब्ध होंगे. कर्मचारियों और उद्यमियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा सुविधाएं, कमर्शियल जोन, खुले पार्क, हरियाली, सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस और अग्निशमन सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है.
बनारसी साड़ी और सिल्क उद्योग को मिलेगी नई दिशा
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के मुताबिक, जमीन हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के नाम हस्तांतरित हो चुकी है. यह पार्क वाराणसी के वस्त्र और सिल्क उद्योग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. औद्योगिक भूखंडों की मांग बढ़ने से क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
वहीं, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की उपायुक्त उद्योग (प्रवर्तन) कुसुम ने इसे वस्त्रोद्योग से जुड़े लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया. उनके अनुसार, इससे काशी की पारंपरिक बुनकारी और रेशमी वस्त्र उद्योग को वैश्विक बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने का अवसर मिलेगा.


