Bareilly-Badaun Highway: बरेली से बदायूं जाने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में सफर आसान होने की उम्मीद है. करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से बरेली से बदायूं बाइपास तक हाईवे चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है. बरसात थमने के बाद निर्माण कार्यों ने फिर रफ्तार पकड़ ली है. परियोजना को नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि, कुछ स्थानों पर जमीन से जुड़े विवाद और अधूरे पक्के निर्माण काम में बाधा बने हुए हैं.
बाइपास, पुल और पुलियों का निर्माण तेज
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की बदायूं इकाई इस परियोजना पर काम करा रही है. मलगांव, बिनावर, भमोरा और देवचरा में बाइपास बनाए जा रहे हैं. इसके साथ ही मुख्य हाईवे के चौड़ीकरण, पुलों और पुलियों के निर्माण का काम भी जारी है.
इस परियोजना की एक अहम कड़ी बिनावर में गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी है. यहां क्रॉस पुल और एप्रोच रोड चालू हो चुके हैं. इससे वाहन चालकों को प्रयागराज और मेरठ की ओर जाने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने का रास्ता मिल रहा है.
जमीन के विवाद बने चुनौती, समय पर काम पूरा होने पर सवाल
निर्माण कार्य में तेजी के बावजूद बिनावर, भमोरा और देवचरा समेत कुछ स्थानों पर जमीन के छोटे-छोटे हिस्सों को लेकर विवाद बना हुआ है. कुछ जगहों पर पक्के निर्माण नहीं हटाए जा सके हैं, जबकि कुछ गांवों में किसानों की जमीन का कब्जा भी नहीं मिल पाया है. बताया गया है कि NHAI के अधिकारी इन मामलों को कई बार जिलाधिकारी के सामने उठा चुके हैं. हालांकि, लंबित प्रकरणों का समाधान नहीं होने से काम प्रभावित होने की आशंका है. यदि जमीन से जुड़े अवरोध जल्द दूर नहीं हुए, तो नवंबर 2027 तक परियोजना पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
अभी मुफ्त सफर, चौड़ीकरण के बाद दो टोल प्लाजा
फिलहाल बरेली से बदायूं और कासगंज होते हुए मथुरा जाने वाले इस मार्ग पर टोल नहीं देना पड़ता है. लेकिन हाईवे चौड़ीकरण परियोजना पूरी होने के बाद दो स्थानों पर टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है.
- देवचरा, बरेली: बाइपास पर पहुंचने से पहले टोल प्लाजा बनाया जा रहा है.
- कछला, बदायूं: बिल्सी रोड के पास दूसरे टोल प्लाजा का निर्माण प्रस्तावित है.
इन टोल प्लाजा के शुरू होने और शुल्क की दरों को लेकर अंतिम जानकारी सामने आने के बाद ही यात्रियों के खर्च का स्पष्ट अनुमान लगाया जा सकेगा.
गुणवत्ता के साथ निर्माण कराने का दावा
NHAI की बदायूं इकाई के परियोजना निदेशक उत्कर्ष शुक्ला के मुताबिक, हाईवे चौड़ीकरण का काम गुणवत्ता के मानकों को ध्यान में रखकर कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई बड़ा अवरोध नहीं है, लेकिन कुछ स्थानों पर पक्के निर्माण हटाने और जमीन का कब्जा लेने से जुड़े मामले बाकी हैं. उन्होंने बताया कि प्रशासन के साथ समन्वय करके इन समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है.
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हाईवे बनने से क्या होगा फायदा?
बरेली-बदायूं हाईवे के चौड़ीकरण से सड़क की क्षमता बढ़ने और आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. बाइपास बनने से कस्बों के भीतर से गुजरने वाले यातायात का दबाव भी कम हो सकता है. गंगा एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने पर लंबी दूरी के यात्रियों को भी फायदा मिल सकता है. हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने, जमीन संबंधी विवाद सुलझने और नई यातायात व्यवस्था लागू होने के बाद ही पूरी तरह सामने आएगा.
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