दुनिया भर में बढ़ते आतंकवाद, साइबर हमलों और अन्य गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों के बीच BRICS देशों ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है. नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई.
बैठक में सदस्य देशों ने माना कि आज की सुरक्षा चुनौतियां केवल पारंपरिक सैन्य खतरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साइबर सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अस्थिरता भी वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी हैं.
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किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण सुरक्षा विषयों पर विचार-विमर्श किया गया.
प्रमुख मुद्दे
| विषय | चर्चा का केंद्र |
|---|---|
| आतंकवाद | सीमा पार और वैश्विक आतंकवादी नेटवर्क |
| साइबर सुरक्षा | साइबर हमलों और डिजिटल खतरों से निपटना |
| खाद्य सुरक्षा | वैश्विक आपूर्ति और उपलब्धता |
| ऊर्जा सुरक्षा | ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता |
| सप्लाई चेन | वैश्विक व्यापार में व्यवधान |
| उभरती तकनीक | नई तकनीकों का दुरुपयोग रोकना |
| जलवायु जोखिम | सुरक्षा पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव |
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई गई कि आतंकवादी संगठन नई और उभरती तकनीकों का इस्तेमाल अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कर सकते हैं.
भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक
यह बैठक भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान आयोजित की गई. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
भारत लगातार यह कहता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक समान और स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है. BRICS मंच पर भी भारत ने आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का समर्थन किया है.
साइबर सुरक्षा क्यों बनी बड़ी चिंता?
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर खतरों का दायरा भी तेजी से बढ़ा है. सरकारी संस्थान, बैंकिंग सिस्टम, ऊर्जा नेटवर्क और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे अब साइबर हमलों के संभावित लक्ष्य बन रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है. इसी कारण BRICS देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया.
BRICS की बढ़ती भूमिका
BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है. हाल के वर्षों में संगठन ने सुरक्षा, तकनीक, वैश्विक शासन और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका बढ़ाई है. वर्तमान में यह समूह दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को एक साथ लाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक चुनौतियों की जटिलता को देखते हुए सदस्य देशों के बीच नियमित संवाद और साझा रणनीति पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
आगे क्या हो सकता है?
बैठक में सदस्य देशों ने सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय, सूचना साझा करने और सहयोगी तंत्र को मजबूत करने पर सहमति जताई. आने वाले समय में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों से जुड़े विषय BRICS एजेंडा में प्रमुख स्थान बनाए रख सकते हैं.
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विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं. ऐसे में BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ना वैश्विक स्थिरता और सुरक्षित डिजिटल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
Source: BRICS National Security Advisers Meeting, Official Briefings.


