भारत में अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों को विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. संचार मंत्रालय के तहत कार्यरत सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हैदराबाद ने एडवांस्ड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है.
इस साझेदारी के तहत IIT हैदराबाद में Centre of Excellence (CoE) की स्थापना की जाएगी, जहां 5G Advanced, 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कम्युनिकेशन और साइबर सुरक्षा जैसी आधुनिक तकनीकों पर उच्चस्तरीय अनुसंधान किया जाएगा.
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कब और कहां हुआ समझौता?
समझौते पर 24 जून 2026 को IIT हैदराबाद परिसर में हस्ताक्षर किए गए.
कार्यक्रम की मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आयोजन | C-DOT और IIT Hyderabad के बीच MoU |
| तारीख | 24 जून 2026 |
| स्थान | IIT Hyderabad |
| उद्देश्य | Advanced Communication Technologies में Centre of Excellence की स्थापना |
| मंत्रालय | Ministry of Communications |
MoU पर हस्ताक्षर IIT हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी. एस. मूर्ति और C-DOT के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. राजकुमार उपाध्याय की मौजूदगी में हुए. इसी कार्यक्रम के दौरान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का औपचारिक उद्घाटन भी किया गया.
क्या होगा इस Centre of Excellence में?
यह सेंटर भारत में अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों पर शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा.
यहां निम्न क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और प्रोटोटाइप विकसित किए जाएंगे:
- 5G Advanced और 6G तकनीक
- Very Large Scale MIMO Systems
- Integrated Sensing and Communication Systems
- AI आधारित Communication Networks
- Quantum Communication
- Post-Quantum Cryptography
- Cyber Security
- Indigenous Telecom Solutions
इसका उद्देश्य केवल शोध करना नहीं बल्कि ऐसी तकनीकों को विकसित करना है जिन्हें भविष्य में उद्योग और सरकारी संस्थानों द्वारा अपनाया जा सके.
छात्रों और स्टार्टअप्स को कैसे मिलेगा फायदा?
नई पहल के तहत छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को उद्योग के साथ मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा.
इस सेंटर के माध्यम से:
- संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू होंगे.
- नई तकनीकों के प्रोटोटाइप विकसित होंगे.
- पेटेंट और बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण को बढ़ावा मिलेगा.
- स्टार्टअप्स को तकनीकी सहयोग मिलेगा.
- प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी.
- उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनेगा.
पहले भी तीन IIT में बन चुके हैं ऐसे सेंटर
IIT हैदराबाद में बनने वाला यह C-DOT का चौथा Centre of Excellence होगा.
इससे पहले ऐसे सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं:
| संस्थान | स्थिति |
| IIT Kanpur | स्थापित |
| IIT Gandhinagar | स्थापित |
| IIT Roorkee | स्थापित |
| IIT Hyderabad | नया Centre of Excellence |
इस पहल का उद्देश्य देशभर में टेलीकॉम रिसर्च का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है.
पहले से चल रहा है उद्योग-अकादमिक सहयोग
C-DOT पहले से ही IIT हैदराबाद से जुड़े स्टार्टअप WiSig के साथ Disaggregated 5G O-RAN Solutions पर काम कर रहा है.
नया Centre of Excellence इस सहयोग को और आगे बढ़ाएगा तथा नई तकनीकों को प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुंचाने में मदद करेगा.
C-DOT प्रमुख ने क्या कहा?
C-DOT के CEO डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि यह सेंटर भारत में अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन तकनीकों के लिए मजबूत नवाचार तंत्र तैयार करेगा.
उनके अनुसार अकादमिक शोध और वास्तविक औद्योगिक जरूरतों को एक मंच पर लाकर भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, सुरक्षित और स्केलेबल टेलीकॉम समाधान विकसित कर सकेगा.
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने “Building Indigenous Communications Technologies for Viksit Bharat” विषय पर विशेष व्याख्यान भी दिया.
इस दौरान उन्होंने भारत के:
- Bharat 6G Vision
- 4G और 5G समाधान
- TRINETRA Cyber Security Suite
- Quantum Key Distribution (QKD)
- Post Quantum Cryptography (PQC)
- Sanchar Saathi
- Fraud Detection Systems
- Mission Critical Communication (MCX)
जैसी स्वदेशी तकनीकों और परियोजनाओं की जानकारी भी साझा की.
IIT Hyderabad ने क्या कहा?
IIT हैदराबाद के निदेशक प्रो. बी. एस. मूर्ति ने कहा कि संस्थान की विशेषज्ञता Communication Engineering, Semiconductor Technology और Wireless Systems में है.
उन्होंने कहा कि C-DOT के साथ यह साझेदारी भारत की स्वदेशी टेलीकॉम तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और छात्रों व शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं पर काम करने का अवसर देगी.
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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
दुनिया तेजी से 6G, AI आधारित नेटवर्क और सुरक्षित डिजिटल संचार की दिशा में आगे बढ़ रही है. ऐसे समय में भारत अपनी स्वदेशी तकनीकों पर विशेष जोर दे रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार इस Centre of Excellence से:
- भारत में 6G अनुसंधान को गति मिलेगी.
- स्वदेशी टेलीकॉम तकनीकों का विकास होगा.
- साइबर सुरक्षा समाधान मजबूत होंगे.
- क्वांटम कम्युनिकेशन पर अनुसंधान बढ़ेगा.
- स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा मिलेगी.
- भारत की वैश्विक टेलीकॉम प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी.
यह पहल ‘विकसित भारत’ और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
Source Ministry of Communications, Government of India.


