भारत और चीन के बीच व्यापारिक मोर्चे पर तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है. गैर-बासमती चावल के बाद अब चीन ने भारत से भेजी गई सूखी लाल मिर्च की खेपों को स्वीकार करने से मना कर दिया है.
‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने भारतीय मिर्च के तीन बड़े कंसाइनमेंट को खारिज कर दिया है और इस सौदे से जुड़ी भारत की तीन निर्यातक कंपनियों पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगा दिया है. चीन के इस कदम से भारतीय मसाला बाजार, निर्यातकों और किसानों में भारी बेचैनी है.
1. चीन का आरोप और भारत का रुख
चीन के सीमा शुल्क अधिकारियों का दावा है कि भारतीय मिर्च में ‘मेथामिडोफोस’ (Methamidophos) नामक कीटनाशक के अंश तय सीमा से बहुत अधिक पाए गए हैं.
यह केमिकल इंसानी नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को नुकसान पहुंचा सकता है. दिलचस्प बात यह है कि भारत में किसानों के लिए इस कीटनाशक का इस्तेमाल आधिकारिक तौर पर स्वीकृत ही नहीं है. ऐसे में चीन के इन दावों पर भारतीय निर्यातकों द्वारा गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं.
2. चावल विवाद से जुड़ रहे हैं तार
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने हाल के दिनों में ऐसा कड़ा रुख अपनाया हो.
पिछले ही महीने, चीन ने भारत से गए गैर-बासमती चावल के लगभग 70 कंसाइनमेंट को यह कहकर खारिज कर दिया था कि इनमें जेनेटिकली मॉडिफाइड (GMO) तत्व मौजूद हैं. भारतीय निर्यातकों ने तब भी इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था.
बैक-टू-बैक हुई इन घटनाओं से यह साफ संकेत मिल रहा है कि चीन जानबूझकर भारत के खिलाफ गैर-टैरिफ व्यापारिक बाधाएं (Non-tariff Barriers) खड़ी कर रहा है.
3. फूड सेफ्टी सिर्फ बहाना, असली खेल कुछ और?
बाजार विशेषज्ञों और रणनीतिकारों का मानना है कि ‘कीटनाशक और फूड सेफ्टी’ केवल एक मुखौटा है, जबकि इसके पीछे चीन की एक सोची-समझी व्यापारिक चाल है.
पिछले दो सालों में जब भारत में मिर्च के दाम कम थे, तब चीन ने भारी मात्रा में मिर्च खरीदकर अपना स्टॉक फुल कर लिया था. अब चूंकि भारत में फसल कम होने से मिर्च की कीमतें बढ़ गई हैं, चीन ‘क्वालिटी’ का बहाना बनाकर मौजूदा कीमतों को कम करने (मोलभाव करने) का दबाव बना रहा है.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि खारिज की गई खेप को चीन ने भारत वापस नहीं भेजा है. इसके बजाय, चीनी आयातक और भारतीय निर्यातक कीमतों में छूट (डिस्काउंट) को लेकर बातचीत कर रहे हैं.
4. भारत के लिए कितना बड़ा झटका?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मिर्च उत्पादक और निर्यातक है, और चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार है.
चीन मुख्य रूप से भारतीय ‘तेजा’ किस्म की मिर्च का आयात करता है, जिसका उपयोग वहां के ओलियोरेसिन उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और कुकिंग में बड़े पैमाने पर होता है.
मिर्च निर्यात के आंकड़े एक नज़र में
| वित्तीय वर्ष (FY) | कुल मिर्च निर्यात (भारत से) | चीन को निर्यात | स्थिति |
|---|---|---|---|
| 2023-24 | 6.01 लाख टन | – | सामान्य |
| 2024-25 | 7.15 लाख टन (19% बढ़ोतरी) | 2.36 लाख टन (31% बढ़ोतरी) | रिकॉर्ड स्तर पर |
| 2025-26 (अब तक) | – | ~3,000 कंटेनर भेजे गए | 10-15% में समस्या का दावा |
चालू सीजन (2025-26) में भेजे गए करीब 3,000 कंटेनरों में से चीन ने 10 से 15 फीसदी में अत्यधिक नमी और कीटनाशकों के अवशेष होने का दावा करते हुए सख्ती बढ़ा दी है.
भारत में पोस्ट-हार्वेस्ट हैंडलिंग (फसल कटाई के बाद के प्रबंधन) में कमी के कारण नमी की समस्या भी एक वजह बनकर उभरी है.
आगे क्या?
चीन की यह नई सख्ती दोनों देशों के बीच एक नई व्यापारिक रस्साकशी (Trade War) की शुरुआत मानी जा रही है.
अगर यह विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर भारतीय मसाला बाजार, निर्यातकों की वित्तीय स्थिति और मिर्च उगाने वाले किसानों की जेब पर पड़ेगा.
अब देखना यह है कि भारत सरकार और वाणिज्य मंत्रालय चीन के इन दबावों का मुकाबला करने के लिए क्या कदम उठाते हैं.


