अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों के बाद वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक सप्ताह के दौरान करीब 16 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
ब्रेंट क्रूड की कीमत 88 डॉलर प्रति बैरल के पार
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड सितंबर वायदा (Brent Crude September Futures) में 15.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
सप्ताह के अंत में इसकी कीमत 88.10 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई.
ब्रेंट क्रूड को वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों का प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है.
WTI क्रूड में भी 15.5% की तेजी
अमेरिकी बेंचमार्क West Texas Intermediate (WTI) क्रूड में भी मजबूत तेजी देखने को मिली.
WTI अगस्त वायदा (August Futures) सप्ताह के दौरान 15.5 प्रतिशत बढ़कर 82.49 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.
इससे स्पष्ट है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भू-राजनीतिक घटनाओं का सीधा असर पड़ रहा है.
क्यों बढ़ीं तेल की कीमतें?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य संघर्ष है.
दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में जवाबी हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है. निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो तेल उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
इसी आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल खरीद बढ़ी और कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया.
वैश्विक आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा
मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है.
यदि क्षेत्र में संघर्ष लंबा खिंचता है तो:
- कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.
- समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है.
- ऊर्जा कंपनियों की लागत बढ़ सकती है.
- वैश्विक बाजार में ईंधन महंगा हो सकता है.
इसी वजह से निवेशक लगातार भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं.
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है.
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर:
- पेट्रोल और डीजल की लागत
- परिवहन खर्च
- महंगाई
- आयात बिल
पर पड़ सकता है. हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर अंतिम फैसला सरकारी नीतियों और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य समीक्षा पर निर्भर करेगा.
विशेषज्ञ क्या मान रहे हैं?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व की स्थिति पर निर्भर करेगी.
यदि तनाव कम होता है तो कीमतों में नरमी आ सकती है, जबकि संघर्ष बढ़ने की स्थिति में वैश्विक बाजार में तेल और महंगा हो सकता है.
अमेरिका ने ईरान पर किए नए हवाई हमले, जॉर्डन में सैनिकों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
FAQs
1. कच्चे तेल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
एक सप्ताह के दौरान वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
2. ब्रेंट क्रूड की कीमत कितनी पहुंची?
ब्रेंट क्रूड सितंबर वायदा 88.10 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.
3. WTI क्रूड की कीमत कितनी रही?
WTI अगस्त वायदा 82.49 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.
4. तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है.


