उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में भीषण गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. ट्रांसफार्मरों के रखरखाव और मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद पिछले करीब दो महीनों में 80 ट्रांसफार्मर खराब हो गए. इसका सीधा असर हजारों उपभोक्ताओं पर पड़ा, जिन्हें बार-बार बिजली कटौती और लो-वोल्टेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा.
गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मरों का खराब होना बिजली विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़ा कर रहा है. खासतौर पर तब, जब विभाग पहले से ही गर्मी के मौसम को देखते हुए रखरखाव अभियान चलाने का दावा कर चुका था.
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सबसे ज्यादा परेशानी किन इलाकों में?
रिपोर्ट के अनुसार मोदीनगर, मुरादनगर और लोनी क्षेत्र के उपभोक्ता सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. कई जगहों पर ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही. गर्मी के दौरान यह स्थिति लोगों के लिए और अधिक मुश्किल साबित हुई.
ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में समस्या का असर ज्यादा देखा गया, जहां वैकल्पिक बिजली व्यवस्था भी सीमित रहती है. ऐसे इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब होने का मतलब कई बार पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप होना होता है.
रखरखाव पर खर्च के बावजूद क्यों बढ़े मामले?
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल है.
यदि ट्रांसफार्मरों की समय पर जांच, लोड प्रबंधन और तकनीकी रखरखाव किया गया था, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर कैसे खराब हो गए? बिजली विशेषज्ञों के अनुसार ट्रांसफार्मर खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें अत्यधिक लोड, उपकरणों की उम्र, तेल की गुणवत्ता, असंतुलित वितरण और तकनीकी खामियां शामिल हैं.
हालांकि गाजियाबाद के मामले में स्थानीय उपभोक्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि रखरखाव पर पहले ही खर्च किया गया था तो समस्या इतनी व्यापक क्यों हुई.
गर्मी ने बढ़ाया दबाव
हर साल मई और जून के दौरान बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है. एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के कारण वितरण नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मांग के अनुरूप क्षमता बढ़ाने और लोड संतुलन की तैयारी पहले से न हो तो ट्रांसफार्मर फेल होने का जोखिम बढ़ जाता है. भारत में ट्रांसफार्मर फेलियर की समस्या पहले भी चिंता का विषय रही है और विभिन्न सरकारी रिपोर्टों में इसे बिजली वितरण व्यवस्था की बड़ी चुनौती बताया गया है.
उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी
ट्रांसफार्मर खराब होने का असर केवल बिजली कटौती तक सीमित नहीं रहता. इससे:
- पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है
- छोटे कारोबारों को नुकसान होता है
- छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान का खतरा बढ़ता है
- ग्रामीण क्षेत्रों में दैनिक कामकाज बाधित होता है
गर्मी के मौसम में लंबे समय तक बिजली न रहने से लोगों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
क्या विभाग करेगा जवाबदेही तय?
बिजली विभागों में ट्रांसफार्मर फेलियर को रोकने के लिए समय-समय पर विशेष निगरानी और जिम्मेदारी तय करने जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाती रही हैं. कई स्थानों पर अधिक लोड या रखरखाव में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाती है.
ऐसे में गाजियाबाद में दो महीनों के भीतर 80 ट्रांसफार्मरों के खराब होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग तकनीकी जांच कराता है या नहीं और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या निकलकर सामने आते हैं.
बढ़ते शहर के सामने नई चुनौती
गाजियाबाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है. नई कॉलोनियों, आवासीय परियोजनाओं और बढ़ती आबादी के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मरम्मत और अस्थायी समाधान पर्याप्त नहीं होंगे. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वितरण नेटवर्क को मजबूत करना, पुराने उपकरणों को बदलना और क्षमता विस्तार करना भी जरूरी होगा.
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क्या सीख मिलती है इस घटना से?
80 ट्रांसफार्मरों का खराब होना केवल एक स्थानीय तकनीकी समस्या नहीं बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था की तैयारियों की परीक्षा भी है. यदि रखरखाव पर खर्च के बावजूद उपकरण बड़ी संख्या में फेल हो रहे हैं, तो यह संकेत है कि केवल खर्च करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी प्रभावशीलता की भी नियमित समीक्षा आवश्यक है.
गर्मी अभी जारी है और बिजली की मांग भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. ऐसे में उपभोक्ताओं की उम्मीद होगी कि विभाग जल्द समाधान निकालकर बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाए.
Source: Dainik Jagran (Ghaziabad Edition), 14 June 2026.


