30 जुलाई को मनाए जाने वाले मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस (World Day Against Trafficking in Persons) पर इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र ने “Trapped Behind the Scam” थीम के साथ एक गंभीर वैश्विक खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है. संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) ने चेतावनी दी है कि संगठित अपराधी गिरोह अब लोगों को फर्जी नौकरी का लालच देकर विदेश ले जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन स्कैम, वित्तीय धोखाधड़ी तथा साइबर अपराध करने के लिए मजबूर करते हैं.
UNODC के अनुसार, यह मानव तस्करी का आधुनिक और बेहद खतरनाक रूप बन चुका है, जिसमें पीड़ितों को कैद कर, डराकर और प्रताड़ित करके अपराध करने के लिए विवश किया जाता है.
फर्जी नौकरी के नाम पर शुरू होता है पूरा खेल
UNODC के मुताबिक, अपराधी सबसे पहले आकर्षक नौकरी के विज्ञापन जारी करते हैं. बेहतर वेतन और विदेश में रोजगार का सपना दिखाकर युवाओं को अपने जाल में फंसाया जाता है.
विदेश पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और दस्तावेज़ छीन लिए जाते हैं तथा उन्हें कथित स्कैम कंपाउंड्स में बंद कर दिया जाता है. वहां उनसे जबरन:
- ऑनलाइन फ्रॉड
- रोमांस स्कैम
- क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी
- निवेश से जुड़े फर्जीवाड़े
- अन्य साइबर अपराध
करवाए जाते हैं.
यदि कोई विरोध करता है या भागने की कोशिश करता है, तो उसके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी जाती हैं.
साइबर अपराध और मानव तस्करी का नया गठजोड़
UNODC का कहना है कि यह केवल मानव तस्करी का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठित अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध का नेटवर्क भी काम करता है.
इसी खतरे से निपटने के लिए दिसंबर 2024 में अपनाया गया संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन देशों के बीच इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साझा करने, सीमा पार जांच और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
भारत ने भी कानूनी ढांचा किया मजबूत
भारत सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के माध्यम से मानव तस्करी और उससे जुड़े संगठित अपराधों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को मजबूत किया है.
इन कानूनों में:
- मानव तस्करी को गंभीर अपराध माना गया है.
- पीड़ितों के पुनर्वास और मुआवजे का प्रावधान किया गया है.
- संगठित अपराधों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान शामिल है.
827 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स कर रही हैं काम
केंद्र सरकार के अनुसार, देशभर में 827 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTUs) की स्थापना में सहायता दी गई है. इनके साथ:
- Crime Multi Agency Centre (Cri-MAC)
- National Database of Human Trafficking Offenders (NDHTO)
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
- मिशन शक्ति के तहत शक्ति सदन
- मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण सेवाएं
जैसी व्यवस्थाएं भी मानव तस्करी के मामलों की रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास में सहयोग कर रही हैं.
संसद और NCRB के आंकड़े क्या बताते हैं?
सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 के तहत दर्ज मामलों की संख्या:
- 2022: 1,497
- 2023: 2,166
रही.
वहीं उपलब्ध NCRB आंकड़ों के अनुसार, 2024 में मानव तस्करी के 2,135 मामले दर्ज किए गए. इनमें:
- तेलंगाना: 423 मामले
- महाराष्ट्र: 337 मामले
- आंध्र प्रदेश: 159 मामले
- दिल्ली: 65 मामले
दर्ज हुए.
दुनिया भर में महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
UNODC के अनुसार:
- मानव तस्करी के पीड़ितों में लगभग एक-तिहाई बच्चे हैं.
- करीब 71 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं और लड़कियां हैं.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, दुनिया में लगभग 2.1 करोड़ लोग जबरन श्रम का शिकार हैं, जिनमें बड़ी संख्या मानव तस्करी से जुड़े मामलों की है.
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क्यों मनाया जाता है यह दिवस?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2013 में 30 जुलाई को मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस घोषित किया था. इसका उद्देश्य मानव तस्करी के पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना, लोगों में जागरूकता बढ़ाना और इस अपराध के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है.
इस वर्ष UNODC ने सरकारों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे जागरूकता बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने और पीड़ितों की सहायता के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करें.
स्रोत: संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC), भारत सरकार से संबंधित उपलब्ध आधिकारिक जानकारी.


