Greater Kanpur Plan: केडीए की प्रस्तावित ग्रेटर कानपुर योजना का असर जमीनों की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है. योजना की घोषणा के बाद भीमसेन, रायपुर खास और आउटर रिंग रोड से सटे इलाकों में जमीनों के भाव सर्किल रेट से तीन गुना तक पहुंच गए हैं. प्राइवेट बिल्डर्स महंगे दामों पर जमीन खरीदकर तेजी से प्लॉटिंग करा रहे हैं. इससे योजना के भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. केडीए के अधिकारियों का दावा है कि सितंबर की शुरुआत में योजना क्षेत्र में जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी.
35 लाख की जमीन 90 लाख रुपये बीघा तक पहुंची
केडीए की ओर से कराए गए सर्वे में सामने आया है कि प्रस्तावित ग्रेटर कानपुर क्षेत्र में निजी सोसाइटियों का निर्माण तेजी से बढ़ रहा है और जमीनों की खरीद-फरोख्त भी जारी है. भीमसेन में जमीन का सरकारी सर्किल रेट करीब 35 लाख रुपये प्रति बीघा है, लेकिन बिल्डर्स यहां 70 से 90 लाख रुपये प्रति बीघा तक में जमीन खरीद रहे हैं. वहीं सचेंडी के रामपुर खास में करीब 13 लाख रुपये प्रति बीघा सर्किल रेट वाली जमीन अब 35 से 40 लाख रुपये प्रति बीघा तक बिक रही है.
बिल्डरों की सक्रियता से किसानों में भी हलचल
जमीनों के अचानक बढ़े दामों के बीच स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं. रामपुर खास के काश्तकार सर्वेश कुशवाहा का कहना है कि सड़क के एक तरफ भीमसेन और दूसरी तरफ उनका गांव है, लेकिन दोनों जगहों के सर्किल रेट में अंतर है. ऐसे में बिल्डर और निजी कंपनियां किसानों को सरकारी दर से बेहतर कीमत की पेशकश कर रही हैं. भीमसेन के विशाल पाल के मुताबिक, क्षेत्र में जमीनों के भाव अचानक बढ़े हैं और कई जगह प्लॉटिंग का काम भी शुरू हो गया है.
पांच हजार एकड़ में बसाया जाएगा ग्रेटर कानपुर
केडीए ने सात गांवों की जमीन को शामिल कर करीब 5,000 एकड़ में ग्रेटर कानपुर बसाने की योजना तैयार की है. इसे तीन चरणों में विकसित किया जाएगा. पहले चरण में करीब 1,200 एकड़ जमीन पर योजना की नींव रखी जाएगी. प्रस्तावित योजना में करीब दो से ढाई हजार किसानों की जमीन अधिग्रहीत किए जाने की तैयारी है. इसके लिए भूमि अधिग्रहण का खाका तैयार किया जा रहा है और किसानों की सूची भी बनाई जा रही है. पहले चरण के लिए तकनीकी और भौगोलिक सर्वे का काम चल रहा है.
ये सात गांव योजना में शामिल
ग्रेटर कानपुर योजना में सेन पश्चिम पारा, सेन पूरब पारा, गोपालपुर, गंभीरपुर, कैंथा, दुर्जनपुरा और इटारा गांव शामिल हैं. केडीए की योजना के मुताबिक नए शहर में करीब पांच लाख लोगों को बसाने की तैयारी है. प्रस्तावित शहर भौंती से करीब पांच किलोमीटर और भीमसेन रेलवे स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर होगा.
आवास से लेकर उद्योग तक, मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
ग्रेटर कानपुर में अलग-अलग आय वर्ग के लिए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे. EWS और LIG वर्ग के लिए भूखंड और फ्लैट होंगे, जबकि MIG और HIG वर्ग के लिए प्लॉट, ग्रुप हाउसिंग और मल्टीस्टोरी आवास बनाए जाने की योजना है. इसके अलावा व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट, पार्क, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, कन्वेंशन सेंटर, स्टेडियम, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और सामुदायिक केंद्र विकसित किए जाएंगे. आधुनिक कूड़ा निस्तारण व्यवस्था, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सोलर लाइट जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं.
खाली जमीन पर निर्माण और प्लॉटिंग पर लगेगी रोक
केडीए के सचिव अभय कुमार पांडेय के मुताबिक, सात गांवों में आवासीय क्षेत्र को छोड़कर बाकी जमीन को चिह्नित किया जा रहा है. इन इलाकों में खाली जमीन पर होने वाले निर्माण को रोका जाएगा और नक्शे पास नहीं किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि जमीनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए सितंबर में नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. इसका उद्देश्य योजना क्षेत्र में अनियोजित निर्माण और निजी प्लॉटिंग पर रोक लगाकर ग्रेटर कानपुर का नियोजित विकास सुनिश्चित करना है.


