Gurugram Metro: गुरुग्राम और मानेसर के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में सफर आसान बनाने की तैयारी तेज हो गई है. सेक्टर-56 से पचगांव तक प्रस्तावित 35.25 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर को आधुनिक तकनीक और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ विकसित करने की योजना है. इस रूट पर मेट्रो की डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जबकि यात्रियों की सुविधा के लिए 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं. कॉरिडोर को रैपिड मेट्रो, रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) और हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) से जोड़ने की भी योजना है.
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को परियोजना की समीक्षा करते हुए संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को तय समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए. योजना का उद्देश्य गुरुग्राम-मानेसर-पचगांव क्षेत्र में बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना है.
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90 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड, आधुनिक सिग्नलिंग से लैस होगी मेट्रो
प्रस्तावित कॉरिडोर को मध्यम क्षमता वाली मेट्रो प्रणाली के रूप में विकसित किया जाएगा. इसकी डिजाइन स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है. इसके लिए कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (CBTC) सिग्नलिंग प्रणाली प्रस्तावित है.
आधुनिक सिग्नलिंग और बेहतर परिवहन व्यवस्था के जरिए इस रूट पर आवाजाही को सुविधाजनक बनाने की योजना है. इसके साथ ही सड़क यातायात का दबाव कम करने और तेजी से विकसित हो रहे शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों तक सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
रैपिड मेट्रो, RRTS और ऑर्बिटल रेल से मिलेगी कनेक्टिविटी
इस परियोजना की खास बात इसका दूसरे रेल आधारित परिवहन नेटवर्क से जुड़ाव है. प्रस्तावित कॉरिडोर को रैपिड मेट्रो, RRTS और हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के साथ एकीकृत करने की योजना है. इससे अलग-अलग परिवहन प्रणालियों के बीच यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाने में मदद मिल सकती है. भविष्य में विकसित होने वाली रेल आधारित प्रणालियों के साथ कनेक्टिविटी को भी योजना का हिस्सा बनाया जा रहा है.
सेक्टर-56 से पचगांव तक कहां-कहां होंगे स्टेशन?
35.25 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर सेक्टर-56 से शुरू होकर गुरुग्राम के कई प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों से गुजरेगा. इसके बाद यह खेड़कीदौला, ग्लोबल सिटी और न्यू गुरुग्राम के कुछ सेक्टरों से होते हुए IMT मानेसर और पचगांव तक पहुंचेगा.
प्रस्तावित रूट में सेक्टर-61, 65, 66, 50, 49, 84, 86 और 90 सहित कई इलाके शामिल हैं. पूरे कॉरिडोर पर कुल 28 स्टेशन प्रस्तावित हैं. इससे रिहायशी क्षेत्रों के साथ-साथ वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों वाले इलाकों को भी सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की योजना है.
अगले 15 से 20 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेगी योजना
परियोजना की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने निर्देश दिया कि कॉरिडोर की योजना अगले 15 से 20 वर्षों में होने वाले शहरीकरण, आबादी में वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर तैयार की जाए.
उन्होंने डीपीआर तैयार करने के स्तर पर ही योजना से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान करने पर जोर दिया, ताकि भविष्य में निर्माण और क्रियान्वयन के दौरान देरी की आशंका कम हो. संशोधित डीपीआर को तय समयसीमा में अंतिम रूप देने के निर्देश भी दिए गए हैं. बैठक में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के एसीएस अनुराग अग्रवाल, निदेशक जे. गणेशन, शहरी स्थानीय निकाय आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, एचएसआईआईडीसी के एमडी विनय प्रताप सिंह, एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक एवं एचएमआरटीसी के एमडी मुकुल कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
फिलहाल परियोजना संशोधित डीपीआर के चरण में है. आगे की प्रक्रिया और निर्माण की समयसीमा तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि गुरुग्राम के लोगों को इस नए मेट्रो कॉरिडोर की सुविधा कब तक मिल सकेगी.
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