Holi 2026 & Holika Dahan: हिंदू पंचांग के अनुसार साल 2026 में होलिका दहन की तिथि को लेकर पहले से ही लोगों में असमंजस बना हुआ था. कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को होलिका दहन की चर्चा की जा रही थी. इसकी मुख्य वजह 3 मार्च 2026 को पड़ने वाला साल का पहला चंद्र ग्रहण है.
हृषीकेश पंचांग और पंडित नरेन्द्र उपाध्याय के अनुसार, इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च 2026, सोमवार की रात को किया जाएगा. हालांकि इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया भी रहेगा, ऐसे में सही मुहूर्त का ध्यान रखना विशेष रूप से आवश्यक है.
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पूर्णिमा तिथि और भद्रा का संयोग
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम 5:18 बजे से होगी. इसी समय से भद्रा का वास भी प्रारंभ हो जाएगा, जो पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च को सुबह 4:56 बजे तक प्रभावी रहेगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है. खासकर होलिका दहन जैसे पर्व पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है. शास्त्रों में भद्रा को अशुभ योग माना गया है और मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का फल विपरीत हो सकता है. इसी कारण ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि होलिका दहन भद्रा समाप्त होने के बाद या भद्रा पुच्छ काल में ही किया जाना चाहिए.
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2026
ज्योतिषाचार्यों और हृषीकेश पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में होलिका दहन के लिए सबसे उपयुक्त और शास्त्रसम्मत समय रात 12:50 बजे से 2:02 बजे तक रहेगा. इस दौरान भद्रा का पुच्छ काल माना जा रहा है, जो होलिका दहन के लिए अनुकूल होता है. यह शुभ मुहूर्त कुल 1 घंटा 12 मिनट का रहेगा. धार्मिक मान्यता है कि इसी समय होलिका दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
भद्रा में होलिका दहन क्यों वर्जित माना जाता है?
पुराणों के अनुसार, भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन माना गया है. जब भद्रा पृथ्वी लोक में होती हैं, तब शुभ कार्यों से परहेज करने की परंपरा है. मान्यता है कि भद्रा काल में किए गए मांगलिक कार्य विघ्न और अशुभ परिणाम दे सकते हैं.
इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्यों के साथ-साथ होलिका दहन भी भद्रा काल में नहीं किया जाता. चूंकि इस वर्ष भद्रा पूरी रात प्रभावी रहेगी, इसलिए केवल भद्रा पुच्छ काल में ही होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है.
रंगों वाली होली 4 मार्च को क्यों?
इस वर्ष होली को लेकर भी लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. पंचांग के अनुसार:
2 मार्च 2026: होलिका दहन
3 मार्च 2026: स्नान-दान की पूर्णिमा
4 मार्च 2026: रंगों वाली होली
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, कई स्थानों पर होलिका दहन के अगले दिन ही होली खेली जाती है. लेकिन इस वर्ष 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण रंगों की होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी.
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन से पहले परिवार के बड़े-बुजुर्गों के साथ विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है.
होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें
कच्चा सूत, गेहूं की बालियां, नारियल और जल अर्पित करें
“ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप करें
बुरी शक्तियों के नाश और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.
होलिका दहन पर क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
सही मुहूर्त में ही होलिका दहन करें. अग्नि को प्रणाम कर परिवार की मंगल कामना करें. अगले दिन होलिका की राख को तिलक के रूप में लगाना शुभ माना जाता है.
क्या न करें:
भद्रा काल में होलिका दहन न करें. आग के पास बच्चों को अकेला न छोड़ें. किसी भी प्रकार की अशांति या विवाद से बचें.
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत जानकारी सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है. हम इसकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करते. अधिक विवरण के लिए आधिकारिक स्रोत या विशेषज्ञ से संपर्क करें.


