Dharm/Jyotish Desk: अक्सर लोग सवाल करते हैं कि जब सब कुछ ठीक करने की कोशिश की जा रही है, तब भी जीवन की परेशानियां कम क्यों नहीं होतीं. नौकरी में रुकावट, व्यापार में लगातार नुकसान, घर में तनाव और मन की अशांति, इन सबके पीछे लोग आमतौर पर ग्रहों को जिम्मेदार मान लेते हैं.
हालांकि इन सबके बारे में कानपुर के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश शास्त्री ने अलग वजहें बताई हैं. उनका कहना है कि कई बार ग्रह नहीं, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की एक छोटी-सी भूल ही बड़ी समस्या बन जाती है. वे वजहें और कारण क्या हैं, इसके बारे में बताते हैं-
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बड़ों और माता-पिता के सम्मान में कमी
पंडित दिनेश के अनुसार, आज के समय में सबसे बड़ी गलती है बड़ों और माता-पिता के सम्मान में कमी. तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग अपनों के लिए समय निकालना ही भूलते जा रहे हैं. बुजुर्गों की बातों को टाल देना, उनकी सलाह को हल्के में लेना या अनजाने में अपमान कर देना सूर्य और गुरु ग्रह को कमजोर करता है.
वे बताते हैं कि जब सूर्य और गुरु का प्रभाव घटता है, तो व्यक्ति के आत्मविश्वास और मान-सम्मान पर सीधा असर पड़ता है. ऐसे लोग मेहनत तो करते हैं, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं आ पाते.
कर्म और व्यवहार के बीच असंतुलन
पंडित दिनेश मानते हैं कि दूसरी बड़ी चूक कर्म और व्यवहार के बीच असंतुलन है. सिर्फ पूजा-पाठ कर लेना ही सब कुछ नहीं होता. अगर व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में झूठ, छल, दिखावा या स्वार्थ को अपनाता है, तो शनि और राहु जैसे ग्रह नकारात्मक असर दिखाने लगते हैं. इसका प्रभाव धीरे-धीरे कामों में देरी, मानसिक दबाव और आर्थिक परेशानियों के रूप में सामने आता है.
प्रकृति और जल का महत्व भूलना
उनका यह भी कहना है कि लोग अक्सर प्रकृति और जल का महत्व भूल जाते हैं. बेवजह पानी बहाना, पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या आसपास गंदगी फैलाना चंद्र और शुक्र ग्रह को कमजोर करता है. चंद्र कमजोर हो तो मन अशांत रहता है और शुक्र बिगड़ने पर रिश्तों में खटास बढ़ने लगती है.
गुस्सा, जल्दबाज़ी और कठोर वाणी
पंडित दिनेश के अनुसार, गुस्सा, जल्दबाज़ी और कठोर वाणी भी नुकसान पहुंचाती है. ऐसी आदतें मंगल और बुध ग्रह को प्रभावित करती हैं. इसका नतीजा यह होता है कि इंसान जल्द फैसले ले लेता है और कई बार बने-बनाए काम आखिरी समय में बिगड़ जाते हैं.
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कैसे बनाएं ग्रहों को अनुकूल
समाधान के सवाल पर पंडित दिनेश किसी कठिन पूजा या महंगे उपाय की बात नहीं करते. उनका कहना है कि छोटे व्यवहारिक बदलाव ही सबसे बड़ा उपाय हैं. बड़ों का सम्मान करें, सच बोलने की आदत डालें, जरूरतमंद की मदद करें और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनें. उनका मानना है कि जब इंसान अपने कर्म सुधार लेता है, तो ग्रहों का प्रभाव अपने आप अनुकूल होने लगता है.
अंत में वे कहते हैं कि ग्रह किसी को सज़ा देने के लिए नहीं होते. वे सिर्फ यह बताते हैं कि हम अपने जीवन में क्या कर रहे हैं. जब इंसान अपनी गलती समझ लेता है, तो वही ग्रह उसका मार्गदर्शन भी करने लगते हैं.


