Retirement Planning Tips: रिटायरमेंट के लिए 1.2 करोड़ से 9 करोड़ रुपये तक की जरूरत पड़ सकती है. CA नितिन कौशिक के 30x नियम, SIP कैलकुलेशन और कंपाउंडिंग के असर को समझें. जानिए देर करने से कैसे हो सकता है 4 करोड़ रुपये का नुकसान.
रिटायरमेंट की बात आते ही अधिकतर लोग यही सोचकर टाल देते हैं कि अभी तो उम्र पड़ी है. लेकिन चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) नितिन कौशिक की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने इस सोच को चुनौती दी है. उनका कहना है कि रिटायरमेंट का मतलब काम से दूरी नहीं, बल्कि डर और असुरक्षा के साथ काम करने की मजबूरी से आजादी है. आज के समय में सुकूनभरी जिंदगी उम्र से नहीं, बल्कि मजबूत वित्तीय तैयारी और महंगाई के सही आकलन से तय होती है. कुछ लाख रुपये अब मेडिकल खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों के सामने बेहद कम साबित हो सकते हैं, इसलिए बड़ा फंड बनाना समय की मांग है.
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शहर के अनुसार तय होगा लक्ष्य
रिटायरमेंट के लिए कितनी रकम चाहिए, यह इस पर निर्भर करता है कि आप भविष्य में किस शहर में रहना चाहते हैं. CA कौशिक के अनुसार, अगर आप किसी छोटे यानी Tier-3 शहर में बसने की योजना बना रहे हैं, तो कम से कम 1.2 करोड़ रुपये का फंड जरूरी है. Tier-2 शहरों में सम्मानजनक जीवन के लिए करीब 3.5 करोड़ रुपये चाहिए होंगे. वहीं, अगर आप दिल्ली या मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में रहना चाहते हैं, तो 8 से 9 करोड़ रुपये या उससे अधिक की जरूरत पड़ सकती है. यह अनुमान केवल सामान्य जीवन स्तर के लिए है, इसमें किसी तरह की विलासिता शामिल नहीं है.
30x नियम से समझें अपनी जरूरत
अपनी रिटायरमेंट कॉर्पस का अंदाजा लगाने के लिए कौशिक एक आसान ‘30x नियम’ बताते हैं. इस फॉर्मूले के तहत अपने सालाना खर्च को 30 से गुणा करें. मान लीजिए आपका सालाना खर्च 8 लाख रुपये है, तो आपको कम से कम 2.4 करोड़ रुपये का फंड तैयार रखना चाहिए. इसमें हेल्थकेयर सबसे बड़ा खर्च होता है, जो कुल बजट का 10-15% तक हिस्सा ले सकता है. बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की सेवाओं की कीमतें धीरे-धीरे बचत को कम करती हैं, इसलिए आज की प्लानिंग भविष्य की कीमतों को ध्यान में रखकर करनी चाहिए.
देरी की कीमत करोड़ों में
रिटायरमेंट प्लानिंग में चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग की ताकत तभी काम करती है जब निवेश जल्दी शुरू किया जाए. अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में 9,000 रुपये प्रति माह की SIP शुरू करता है और उसे 12% का रिटर्न मिलता है, तो 60 साल की उम्र तक वह लगभग 5.8 करोड़ रुपये का फंड बना सकता है. लेकिन यही निवेश अगर 10 साल बाद, यानी 35 या 40 की उम्र में शुरू किया जाए, तो यह रकम घटकर करीब 1.8 करोड़ रुपये रह जाती है. यानी सिर्फ 10 साल की देरी से लगभग 4 करोड़ रुपये का अंतर आ सकता है. समय पर शुरुआत न करना, दरअसल धन सृजन के बड़े मौके को खो देना है.
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छोटी शुरुआत, बड़ा असर
निवेश के लिए बड़ी रकम होना जरूरी नहीं है. CA कौशिक का कहना है कि 2,000 से 5,000 रुपये प्रति माह से भी शुरुआत की जा सकती है, बशर्ते निवेश में निरंतरता और अनुशासन बना रहे. रिटायरमेंट का असली उद्देश्य आलीशान जिंदगी नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता है, ऐसी स्थिति जहां डॉक्टर के पास जाने से पहले बैंक बैलेंस देखने की चिंता न हो. भविष्य में किसी भी तरह की घबराहट से बचने का रास्ता आज की ठोस प्लानिंग से ही निकलता है. याद रखिए, सुकून भरा भविष्य आज की छोटी लेकिन नियमित बचत से ही तैयार होता है.


