आम की फसल भारतीय बागवानी का आधार है, लेकिन वर्तमान समय में बदलता मौसम और विभिन्न फफूंदजनित (Fungal) रोग इसके उत्पादन के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं. यदि समय रहते इन बीमारियों की पहचान कर उनका वैज्ञानिक प्रबंधन न किया जाए, तो किसानों को फल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में भारी वित्तीय घाटा सहना पड़ सकता है.
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एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose)
यह आम की सबसे सामान्य और विनाशकारी बीमारी मानी जाती है, जो ‘कोलेटोट्राइकम ग्लोयोस्पोरियोइड्स’ नामक फफूंद के कारण फैलती है. यह पत्तियों, फूलों और फलों सभी को प्रभावित करती है.
लक्षण और प्रभाव
इस रोग के कारण पत्तियों और फलों पर काले या भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं. संक्रमण बढ़ने पर फलों में सड़न शुरू हो जाती है, जिससे उनकी बाजार में मांग और कीमत घट जाती है. कई बार फूल भी सूखकर गिरने लगते हैं, जिससे फल बनने की प्रक्रिया ही रुक जाती है.
उपाय और प्रबंधन
संक्रमित शाखाओं और पत्तियों की समय-समय पर छंटाई करना बहुत जरूरी है. बाग में सफाई रखें और रोग नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम प्रति लीटर) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें.
पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew)
यह रोग मुख्य रूप से आम के बौर (फूलों) और नई पत्तियों को प्रभावित करता है. यह ‘ओइडियम मैंगिफेरी’ फफूंद से फैलता है और पैदावार को भारी नुकसान पहुँचाता है.
लक्षण और प्रभाव
प्रभावित हिस्सों पर सफेद पाउडर जैसी एक परत दिखाई देने लगती है. इसके कारण फूल सूखकर गिर जाते हैं और छोटे फल समय से पहले झड़ जाते हैं. अधिक नमी वाले वातावरण में यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है.
उपाय और प्रबंधन
इसके नियंत्रण के लिए सल्फर आधारित फफूंदनाशी का उपयोग करें. प्रभावी समाधान के लिए हेक्साकोनाजोल (1 मिली प्रति लीटर) का स्प्रे करें. साथ ही, बाग में संतुलित वातावरण बनाए रखें.
ब्लैक स्पॉट (Black Spot)
यह रोग ‘गुइग्नार्डिया मैंगिफेरा’ फफूंद के कारण होता है और मुख्य रूप से फलों की बाहरी सतह को नुकसान पहुँचाता है.
लक्षण और प्रभाव
फलों पर छोटे काले धब्बे उभर आते हैं, जो धीरे-धीरे बड़े हो जाते हैं. इससे फल देखने में खराब लगते हैं, जिससे उनका बाजार मूल्य और निर्यात की संभावना कम हो जाती है.
उपाय और प्रबंधन
कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव इस रोग में बहुत प्रभावी है. संक्रमित फलों को तुरंत नष्ट कर दें और पेड़ों की नियमित छंटाई करें ताकि हवा और धूप का संचार बेहतर रहे.
स्टेम एंड रॉट (Stem End Rot)
यह समस्या अक्सर भंडारण और परिवहन के दौरान देखी जाती है. यह ‘डिप्लोडिया नैटालेंसिस’ फफूंद की वजह से होती है.
लक्षण और प्रभाव
इसमें फल डंठल वाले हिस्से (ऊपरी भाग) से काला पड़ना शुरू होता है और धीरे-धीरे पूरा फल सड़ जाता है. इससे किसानों और व्यापारियों को भारी आर्थिक चपत लगती है.
उपाय और प्रबंधन
फलों की कटाई के बाद उन्हें 52 डिग्री सेल्सियस के गर्म पानी में 5 मिनट तक उपचारित करना चाहिए. इसके अलावा, बाग में कार्बेन्डाजिम का उचित उपयोग फफूंद के प्रसार को रोकने में मदद करता है.
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डाई बैक या सूखना रोग (Die Back)
यह ‘लासियोडिप्लोडिया थियोब्रोमी’ फफूंद के कारण होने वाला रोग है, जिसमें पेड़ ऊपर से नीचे की ओर सूखने लगता है.
लक्षण और प्रभाव
पेड़ की टहनियां ऊपर से सूखनी शुरू होती हैं और पत्तियां मुरझाकर गिर जाती हैं. धीरे-धीरे पूरा पौधा कमजोर हो जाता है और गंभीर स्थिति में शाखाएं पूरी तरह सूखकर नष्ट हो सकती हैं.
उपाय और प्रबंधन
प्रभावित सूखी शाखाओं को काट कर हटा दें और कटे हुए हिस्से पर बोर्डो पेस्ट लगाएं. कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव भी लाभकारी है. संतुलित खाद, सही सिंचाई और जल निकासी की व्यवस्था इस रोग से लड़ने में मदद करती है.


