Uttarakhand mysterious dargah: देवभूमि उत्तराखंड अपनी आस्था, मंदिरों और आध्यात्मिक स्थलों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. लेकिन इसी पवित्र धरती पर एक ऐसी दरगाह भी मौजूद है, जिसके बारे में सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं. यहां सिर्फ दुआएं ही नहीं मांगी जातीं, बल्कि दावा किया जाता है कि भूत-प्रेत और जिन्न जैसी ऊपरी बाधाओं से भी छुटकारा मिलता है. हम बात कर रहे हैं पिरान कलियर शरीफ दरगाह की, जिसे देश की दूसरी सबसे बड़ी दरगाह माना जाता है.
रुड़की से करीब 20 किलोमीटर दूर गंगा तट के पास स्थित यह दरगाह सूफी संत हजरत अलाउद्दीन अली अहमद साबिर की मजार है. यहां हर दिन हजारों की संख्या में हिंदू, मुस्लिम, सिख और दूसरे धर्मों के लोग चादर चढ़ाने और मन्नत मांगने पहुंचते हैं. लोगों का मानना है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर दुआ कबूल होती है.
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‘भूत-प्रेतों को फांसी’ देने की अनोखी मान्यता
कलियर शरीफ को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी रहस्यमयी मान्यताओं को लेकर होती है. कहा जाता है कि जिन लोगों पर भूत-प्रेत या जिन्न का साया होता है, उन्हें यहां लाया जाता है और विशेष धार्मिक प्रक्रिया के जरिए उनसे छुटकारा दिलाया जाता है. मान्यता है कि यहां आने वाले पीड़ितों को सबसे पहले हजरत इमाम साहब की दरगाह पर ले जाया जाता है, जहां शिकायत का पर्चा दिया जाता है. इसके बाद उन्हें किलकली साहिब, नमक वाला पीर और साबरी बाग जैसी दरगाहों पर हाजिरी दिलाई जाती है. नमक वाला पीर पर नमक, झाड़ू और कौड़ियां चढ़ाने की परंपरा है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इससे ऊपरी बाधाओं और कुछ त्वचा रोगों में राहत मिलती है.
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि यहां “भूत-प्रेतों को फांसी” देने की बात कही जाती है. लोगों का दावा है कि विशेष रस्मों और दुआओं के बाद पीड़ित व्यक्ति को उसी समय राहत मिल जाती है. हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन आस्था के कारण दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं.
हर साल उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
पिरान कलियर शरीफ दरगाह में सालभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. खासतौर पर उर्स के दौरान यहां लाखों लोग पहुंचते हैं. दरगाह की फिजा में सूफी कव्वालियां, इबादत और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
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कैसे पहुंचे पिरान कलियर दरगाह?
- रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रुड़की रेलवे स्टेशन है, जो दरगाह से करीब 10 किलोमीटर दूर है.
- सड़क मार्ग: रुड़की राष्ट्रीय राजमार्ग से कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है. यहां से टैक्सी, ऑटो और बस आसानी से मिल जाती हैं.
- हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है. वहां से सड़क मार्ग द्वारा दरगाह पहुंचा जा सकता है.


