रामपुर जिले के दढ़ियाल चौकी क्षेत्र से एक बेहद अनोखा और दिलचस्प मामला सामने आया है. दो पत्नियों के बीच पति को लेकर चल रहे लंबे विवाद को सुलझाने के लिए बुलाई गई गांव की पंचायत ने एक ऐसा फरमान सुनाया है, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है. पंचायत ने न केवल पति की आर्थिक जिम्मेदारी तय की, बल्कि यह भी तय कर दिया कि वह किस पत्नी के साथ हफ्ते में कितने दिन गुजारेगा.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, युवक की पहली शादी करीब 14 साल पहले हुई थी. इसके लगभग 10 साल बाद उसने दूसरी शादी कर ली. दोनों पत्नियों से उसकी दो-दो बेटियां हैं, यानी परिवार में कुल चार बेटियां हैं. पहली पत्नी का आरोप था कि दूसरी शादी करने के बाद से पति ने उसे और उसके बच्चों को पूरी तरह से नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था. न तो वह रोजमर्रा के खर्चों की जिम्मेदारी उठा रहा था और न ही घर पर समय दे रहा था. उसका अधिकांश समय दूसरी पत्नी के साथ ही बीतता था. पति की इस अनदेखी से परेशान होकर पहली पत्नी ने आखिरकार पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई.
पुलिस चौकी से पंचायत तक पहुंचा विवाद
मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद, दोनों पक्षों के परिजनों और गांव के गणमान्य लोगों ने आपसी सहमति से इसे सुलझाने की पहल की. कानूनी कार्रवाई से पहले गांव में एक पंचायत बुलाई गई. कई घंटों तक चली इस पंचायत में दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुना गया. ग्रामीणों का कहना था कि माता-पिता के इस रोज-रोज के झगड़े का सबसे बुरा असर चारों मासूम बेटियों पर पड़ रहा था. इसलिए बच्चों के भविष्य और परिवार में शांति बनाए रखने के लिए पंचायत ने बीच का रास्ता निकालने का फैसला किया.
खर्च से लेकर रहने का शेड्यूल तय
लंबी चर्चा और आपसी सहमति के बाद पंचायत ने पति के सामने कुछ सख्त शर्तें रखते हुए समझौते का नया ‘फॉर्मूला’ तैयार किया.पति हर महीने पहली पत्नी के घर पूरा राशन पहुंचाएगा. इसके अलावा, उसके निजी और रोजमर्रा के खर्चों के लिए हर हफ्ते ₹500 अलग से देगा. पंचायत ने पति के रहने का दिनवार शेड्यूल तय कर दिया. आदेश के मुताबिक, 3 दिन पहली पत्नी के साथ रहना होगा. 3 दिन दूसरी पत्नी के साथ बिताना होगा. 7वां दिन (रविवार/इच्छा अनुसार) सातवें दिन वह किसकी साथ रहेगा, यह पूरी तरह से पति की अपनी मर्जी पर छोड़ दिया गया है.
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पंचायत का मानना है कि इस व्यवस्था से दोनों परिवारों के बीच संतुलन बना रहेगा, आर्थिक तंगी दूर होगी और घरेलू विवाद खत्म होगा. फिलहाल, दोनों पक्ष इस अनोखे फैसले पर सहमत हो गए हैं और क्षेत्र में यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है.


