Mehndi in Sawan: जैसे ही सावन का महीना आता है, वैसे ही चारों तरफ हर-हर महादेव के जयकारे लगना शुरू हो जाते हैं. हर कोई शिव की भक्ति में लीन हो जाता है. महिलाएं तो इसका विशेषकर इंतजार करती हैं. दरअसल, सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष समय माना जाता है. इस पूरे महीने में महिलाएं और युवतियां व्रत रखती हैं, शिव मंदिरों में जलाभिषेक करती हैं, हरियाली का उत्सव मनाती हैं और हाथों में मेहंदी रचाती हैं.
भारतीय परंपरा में मेहंदी केवल श्रृंगार का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे सौभाग्य, प्रेम, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है. यही कारण है कि सावन शुरू होते ही यह सवाल सबसे अधिक पूछा जाता है कि आखिर सावन में मेहंदी लगाने का सबसे शुभ दिन कौन सा होता है.
यदि आप भी सावन में मेहंदी लगाने की सोच रहीं हैं, तो आइए जानते हैं कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कौन से दिन सबसे शुभ माने जाते हैं और इसके पीछे क्या कारण बताए गए हैं-
सावन में मेहंदी लगाने का सबसे शुभ दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार मेहंदी लगाने के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं. सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने के बाद हाथों में मेहंदी रचाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में सुख, प्रेम और सौभाग्य की वृद्धि होती है.

इसके अलावा सावन के शुक्रवार भी विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं. शुक्रवार माता लक्ष्मी और देवी संतोषी से जुड़ा दिन माना जाता है. विवाहित महिलाएं इस दिन सुहाग के प्रतीक श्रृंगार के साथ मेहंदी भी लगाती हैं.
हरियाली तीज पर मेहंदी का विशेष महत्व
सावन में आने वाली हरियाली तीज को मेहंदी लगाने का सबसे लोकप्रिय और शुभ अवसर माना जाता है. इस दिन महिलाएं सुंदर मेहंदी लगाकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं. मान्यता है कि हरियाली तीज पर रची मेहंदी वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और प्रेम का प्रतीक होती है.
नाग पंचमी पर भी लगाई जाती है मेहंदी
कई क्षेत्रों में नाग पंचमी के अवसर पर भी महिलाएं मेहंदी लगाती हैं. वैसे तो यह परंपरा पूरे भारत में समान नहीं है, लेकिन कई राज्यों में इसे शुभ माना जाता है. इस दिन पूजा के साथ सोलह श्रृंगार करने की भी परंपरा देखने को मिलती है.

क्या कुंवारी लड़कियां भी सावन में मेहंदी लगा सकती हैं?
जी हां. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंवारी कन्याएं भी सावन में मेहंदी लगा सकती हैं. माना जाता है कि भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी हो सकती है. इसी कारण सावन के सोमवार और हरियाली तीज पर बड़ी संख्या में अविवाहित युवतियां भी मेहंदी लगाती हैं.
मेहंदी लगाने का सही समय
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार दिन के समय या शाम को मेहंदी लगाना अधिक शुभ माना जाता है. यदि उसी दिन पूजा या व्रत है, तो कई लोग पूजा से पहले मेहंदी लगाने की सलाह देते हैं ताकि पूजा के समय मेहंदी अच्छी तरह रच जाए. ध्यान रहे कि अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराएं भिन्न हो सकती हैं.
सावन में मेहंदी लगाने का धार्मिक महत्व
हिंदू परंपरा में मेहंदी को शुभता, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. कहा जाता है कि जितनी गहरी मेहंदी रचती है, उतना ही प्रेम और शुभता का संकेत माना जाता है. बता दें कि यह एक पारंपरिक लोकमान्यता है, धार्मिक ग्रंथों में इसका कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिलता.
क्या किसी दिन मेहंदी लगाने की मनाही है?
ऐसा कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है कि सावन के किसी विशेष दिन मेहंदी बिल्कुल नहीं लगाई जा सकती. अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और परंपराओं में अलग मान्यताएं हो सकती हैं. इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करना उचित माना जाता है.
मेहंदी लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- प्राकृतिक और हर्बल मेहंदी का ही उपयोग करें.
- यदि त्वचा संवेदनशील है, तो पहले पैच टेस्ट कर लें.
- पूजा के लिए मेहंदी लगाते समय हाथ साफ रखें.
- रासायनिक रंग वाली मेहंदी से बचने की कोशिश करें.
सावन में मेहंदी लगाने के लिए सबसे शुभ दिन सामान्य धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के सोमवार, हरियाली तीज और सावन के शुक्रवार माने जाते हैं. इन दिनों मेहंदी लगाना भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद, सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. हालांकि यह सभी मान्यताएं परंपरा और आस्था पर आधारित हैं. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की अपनी-अपनी परंपराएं हो सकती हैं.
स्रोत: शिव पुराण से संबंधित पारंपरिक मान्यताएं, धर्मशास्त्रीय परंपराएं, विभिन्न भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक मान्यताएं.


