हैदराबाद: दिग्गज फिल्ममेकर, स्क्रीनराइटर और संगीतकार सिंगीतम श्रीनिवास राव के निधन से भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर है. 94 साल की उम्र में शनिवार को दुनिया को अलविदा कहने वाले राव को निर्देशक एसएस राजामौली ने याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक पूरी पीढ़ी को यह विश्वास दिलाया कि सिनेमा में कल्पना की कोई सीमा नहीं होती.
सिंगीतम श्रीनिवास राव का फिल्मी करियर छह दशक से भी ज्यादा लंबा रहा. उन्होंने तेलुगु समेत कई भारतीय भाषाओं में काम किया और कॉमेडी, फैंटेसी, साइंस फिक्शन और ड्रामा जैसी अलग-अलग शैलियों में अपनी पहचान बनाई.
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साधन और बजट कम थे, फिर भी बड़े सपने देखे
राजामौली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राव को याद करते हुए लिखा कि जिस दौर में फिल्मकारों के पास आज जैसी तकनीक और बड़े बजट नहीं थे, उस समय भी राव ने प्रयोग करने से कभी परहेज नहीं किया.
राजामौली ने लिखा कि बहुत पहले, जब हमारे पास न इतने साधन थे और न बजट, तब उन्होंने अपने आसपास के किसी भी व्यक्ति से बड़े सपने देखने की हिम्मत की.” उन्होंने आगे कहा कि राव ने बिना एक भी संवाद वाली फिल्म बनाई, दर्शकों को समय की यात्रा कराई और कॉमेडी से लेकर फैंटेसी और गहरे मानवीय ड्रामा तक अलग-अलग शैलियों में इस तरह काम किया, जैसे उनके बीच कोई सीमा ही न हो. राजामौली के मुताबिक, राव ने फिल्मकारों की एक पूरी पीढ़ी को यह सिखाया कि सिनेमा में असली सीमा सिर्फ कल्पना है.
‘तेलुगु सिनेमा में जिसने भी कुछ अलग किया, उनका योगदान है’
राजामौली ने कहा कि तेलुगु सिनेमा में प्रयोग करने वाले लगभग हर फिल्मकार पर किसी न किसी रूप में राव का प्रभाव रहा है. तेलुगु सिनेमा में जिसने भी कुछ अलग करने की कोशिश की है, वह जाने या अनजाने में उनका कुछ न कुछ ऋणी है. मैं निश्चित तौर पर हूं. राजामौली ने सिंगीतम श्रीनिवास राव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा, ‘मेरी गहरी संवेदनाएं सिंगीतम श्रीनिवास राव गरु के परिवार के साथ हैं. ओम शांति.’
‘मायाबाजार’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर
सिंगीतम श्रीनिवास राव ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत दिग्गज निर्देशक केवी रेड्डी के साथ की थी. वह 1957 में आई भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्म ‘मायाबाजार’ से भी जुड़े रहे. इसके बाद उन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा और आने वाले वर्षों में 60 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया. राव ने अपने लंबे करियर में अलग-अलग भाषाओं और कई तरह की फिल्म शैलियों के साथ प्रयोग किया. कॉमेडी, साइंस फिक्शन, फैंटेसी और ड्रामा हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई.
‘मयूरी’ से ‘पुष्पक विमान’ तक
1985 में आई फिल्म ‘मयूरी’ उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल रही. यह फिल्म मशहूर डांसर सुधा चंद्रन के जीवन पर आधारित थी. फिल्म को कई सम्मान मिले और इसे कई नंदी पुरस्कार भी प्राप्त हुए. इसके बाद 1987 में आई ‘पुष्पक विमान’ ने भारतीय सिनेमा में एक अलग प्रयोग की मिसाल पेश की. कमल हासन अभिनीत इस ब्लैक कॉमेडी फिल्म में बोले गए संवाद नहीं थे. फिल्म ने दर्शकों और आलोचकों दोनों का ध्यान खींचा और इसे सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म प्रदान करने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. कमल हासन के साथ राव की जोड़ी ने ‘अपूर्व सगोदररगल’ और ‘माइकल मदाना काम राजन’ जैसी फिल्मों में भी काम किया.
‘आदित्य 369’ में दिखाया टाइम ट्रैवल का अनोखा संसार
तेलुगु सिनेमा में ‘आदित्य 369’ सिंगीतम श्रीनिवास राव की सबसे चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है. यह साइंस फिक्शन फिल्म टाइम ट्रैवल की अवधारणा पर आधारित थी, उस दौर में जब भारतीय सिनेमा में इस तरह की कहानियां बहुत कम देखने को मिलती थीं.
राव का सिनेमा इसी प्रयोगधर्मिता के लिए याद किया जाता है. उन्होंने सीमित संसाधनों के दौर में ऐसी कहानियां और तकनीकी प्रयोग किए, जिन्होंने बाद की पीढ़ी के फिल्मकारों को नई कल्पना के साथ सिनेमा बनाने की प्रेरणा दी.
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