Gwalior, August 23: मरीजों और आम लोगों की सुरक्षित यात्रा को लेकर ग्वालियर जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के निर्देश पर परिवहन विभाग ने अस्पताल परिसरों में एम्बुलेंसों की विशेष जांच की. इस दौरान 45 एम्बुलेंसों की जांच की गई, जिनमें 15 में नियमों से जुड़ी कमियां मिलीं.
जांच के बाद इन 15 एम्बुलेंस संचालकों पर कुल 57 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. अधिकारियों ने संचालकों को जरूरी दस्तावेज अपडेट रखने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी है.
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तीन बड़े अस्पताल परिसरों में हुई जांच
परिवहन विभाग की टीम ने ग्वालियर के 1000 बिस्तर अस्पताल, कैंसर अस्पताल और जयारोग्य अस्पताल परिसर में औचक निरीक्षण किया.
इस दौरान एम्बुलेंसों के दस्तावेजों के साथ-साथ उनके जरूरी सुरक्षा मानकों की भी जांच की गई. अधिकारियों ने यह भी देखा कि मरीजों को लाने-ले जाने वाले वाहनों में नियमों के मुताबिक जरूरी कागजात मौजूद हैं या नहीं.
15 एम्बुलेंसों में मिलीं गंभीर कमियां
जांच के दौरान 45 एम्बुलेंसों में से 15 के दस्तावेजों में खामियां सामने आईं.
इनमें कुछ वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट, वैध इंश्योरेंस और PUC जैसे जरूरी दस्तावेज या तो एक्सपायर मिले या उपलब्ध नहीं थे.
परिवहन विभाग ने नियमों का पालन नहीं करने वाले 15 एम्बुलेंस संचालकों पर कुल 57 हजार रुपये का जुर्माना लगाया.
मरीजों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की सख्ती
अधिकारियों ने साफ किया कि एम्बुलेंस एक emergency service है. ऐसे वाहनों में तकनीकी खामी या जरूरी दस्तावेजों की कमी मरीजों की सुरक्षा के लिए बड़ी समस्या बन सकती है.
मौके पर मौजूद परिवहन अधिकारियों ने एम्बुलेंस संचालकों को चेतावनी दी कि सभी जरूरी दस्तावेज समय पर अपडेट रखें और वाहन को तय safety standards के मुताबिक ही संचालित करें.
सिर्फ जुर्माना नहीं, व्यवस्था सुधारना मकसद
जिला प्रशासन के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ चालान या जुर्माना लगाना नहीं है. कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने वाली एम्बुलेंस सुरक्षित और नियमों के मुताबिक हों.
प्रशासन ने कहा कि मरीजों और यात्रियों की safety उसकी priority है. इसी वजह से अस्पताल परिसरों में इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी.
अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में भी होगी जांच
प्रशासन ने साफ किया है कि यह अभियान सिर्फ एक दिन की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा. जिले के अलग-अलग अस्पतालों और nursing homes में भी आगे औचक निरीक्षण किए जाएंगे.
जो एम्बुलेंस संचालक तय नियमों और safety standards का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार और सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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इस अभियान के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि emergency service के नाम पर मरीजों को किसी तरह के unsafe vehicle में सफर न करना पड़े.


