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वो दिन बड़े सुहाने थे, जब हम सबसे बेगाने थे,गुड्डे-गुड़ियों के खेल थे, जज्बातों के मेल थे,जमाने वो अनसुने हो…
तुम घने जंगल,तो लकड़ी हूं मैं,तुम लहराते सागर,तैरती इक मछली हूं मैं. भूलकर न गई तेरी नजर,बनारस की वो गली…
वो दिन बड़े सुहाने थे, जब हम सबसे बेगाने थे,गुड्डे-गुड़ियों के खेल थे, जज्बातों के मेल थे,जमाने वो अनसुने हो…
तुम घने जंगल,तो लकड़ी हूं मैं,तुम लहराते सागर,तैरती इक मछली हूं मैं. भूलकर न गई तेरी नजर,बनारस की वो गली…

