Varanasi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में ट्रैफिक जाम की समस्या से जल्द राहत मिलने वाली है. शहर में देश का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है. करीब 807 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरू होने से कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक का सफर महज 15 से 16 मिनट में पूरा हो सकेगा. अभी सड़क मार्ग से पीक आवर्स में इस दूरी को तय करने में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लग जाता है.
100 फीट की ऊंचाई से दिखेगा काशी का खूबसूरत नजारा
वाराणसी का यह रोपवे सिर्फ यातायात का साधन नहीं, बल्कि पर्यटकों के लिए एक अनूठा अनुभव भी साबित होगा. पारदर्शी गोंडोला (ट्रॉली) में बैठकर यात्री जमीन से करीब 100 फीट की ऊंचाई पर हवा में सफर करेंगे. इस दौरान शहर की ऐतिहासिक इमारतें, व्यस्त सड़कें, काशी विद्यापीठ और सिगरा स्टेडियम का विहंगम दृश्य दिखाई देगा.
रोपवे से गिरजाघर स्टेशन के आसपास पहुंचने पर बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर समेत आसपास के प्रमुख मंदिरों के शिखर भी नजर आएंगे. इससे पर्यटकों को हवाई सफर के साथ बनारस की खूबसूरती को करीब से देखने का मौका मिलेगा.
कैंट से गोदौलिया तक होंगे 5 आधुनिक स्टेशन
- वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन
- काशी विद्यापीठ
- रथयात्रा
- गिरजाघर
- गोदौलिया
इस रूट के शुरू होने से कैंट रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को शहर के व्यस्त इलाकों से गुजरते हुए जाम में फंसने की परेशानी से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है.
10 से 50 रुपये तक होगा किराया, स्मार्ट कार्ड पर छूट
रोपवे का किराया यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 10 से 50 रुपये के बीच निर्धारित किया गया है. कैंट से गोदौलिया तक पूरे सफर के लिए 50 रुपये किराया देना होगा. इसके अलावा मेट्रो की तर्ज पर स्मार्ट कार्ड की सुविधा भी मिलेगी. स्मार्ट कार्ड से टिकट लेने पर यात्रियों को 20 प्रतिशत तक की छूट मिल सकेगी.
इस परियोजना में करीब 148 से 220 गोंडोला संचालित करने की योजना है. प्रत्येक ट्रॉली में एक बार में 10 यात्री सफर कर सकेंगे. सुरक्षा और संचालन के लिए आधुनिक मोनो-केबल डिटेचेबल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
काशी विश्वनाथ मंदिर और दशाश्वमेध घाट पहुंचना होगा आसान
गोदौलिया स्टेशन पर उतरने के बाद श्रद्धालुओं के लिए बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर और मां गंगा के दशाश्वमेध घाट तक पहुंचना आसान होगा. खासकर बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों को शहर के भीड़भाड़ वाले रास्तों से गुजरने में राहत मिलने की उम्मीद है.
2023 में रखी गई थी आधारशिला, ट्रायल भी पूरा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला मार्च 2023 में रखी गई थी. परियोजना के निर्माण पर अलग-अलग चरणों में करीब 645 से 807 करोड़ रुपये की लागत का उल्लेख किया गया है. हाल ही में दूसरे चरण का ट्रायल रन सिगरा स्थित काशी विद्यापीठ स्टेशन पर सफलतापूर्वक पूरा किया गया.
यह भी पढ़ें- वाराणसी-दिल्ली के बीच दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, रातभर का सफर होगा आरामदायक, जानें टाइमिंग और स्टॉपेज
अब परियोजना के जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है. माना जा रहा है कि इसके चालू होने से वाराणसी के यातायात को नई रफ्तार मिलेगी और काशी आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए सफर पहले से ज्यादा आसान और यादगार हो जाएगा.


