Bihar News: बिहार में गंगा नदी के किनारे विकास की नई तस्वीर तैयार करने की योजना है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बक्सर से भागलपुर तक करीब 400 किलोमीटर लंबा औद्योगिक गलियारा विकसित करने का बड़ा ऐलान किया है. इस परियोजना के तहत गंगा से गाद निकालकर तटबंध और सड़कें बनाई जाएंगी. वहीं, प्रमुख शहरों के आसपास नए नगर भी बसाए जाएंगे, जहां लोगों को नदी के सामने खूबसूरत घर उपलब्ध कराने की योजना है.
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पटना के होटल चाणक्या में आयोजित ‘गंगा जल संधि और बिहार की जल सुरक्षा’ संगोष्ठी में यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि नदियां और आबादी बिहार की कमजोरी नहीं, बल्कि विकास की ताकत बन सकती हैं. सरकार अब केवल बाढ़ से बचाव और राहत वितरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थायी समाधान की दिशा में काम करेगी.
गंगा किनारे विकसित होगा 400 किलोमीटर का औद्योगिक गलियारा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बक्सर से भागलपुर तक गंगा के किनारे लगभग 400 किलोमीटर लंबा औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाएगा. इसके साथ ही प्रमुख शहरों के पास नए नगर बसाने की योजना है. इन नगरों में आधुनिक सुविधाओं के साथ गंगा के सामने घर विकसित किए जाएंगे.
सरकार का उद्देश्य गंगा किनारे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ शहरी विकास और रोजगार के नए अवसर तैयार करना है.
गंगा की गाद से बनेंगी सड़कें, NHAI से होगा समझौता
सीएम ने गंगा नदी में जमा गाद को भी विकास के लिए उपयोग करने की बात कही. उन्होंने बताया कि गाद के इस्तेमाल के लिए बिहार सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच समझौता किया जाएगा. इससे निकाली गई गाद का इस्तेमाल सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जा सकेगा.
इसके अलावा विशेषज्ञों की टीम गंगा का हवाई सर्वेक्षण करेगी, ताकि नदी की मौजूदा स्थिति, गाद और जल प्रवाह का आकलन किया जा सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार ने अपनी गाद नीति तैयार की है, लेकिन अब इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी नीति बनाने की जरूरत है.
गंगा जल समझौते में बिहार के हितों को मिले प्राथमिकता
संगोष्ठी में मुख्यमंत्री ने पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि गंगा जल समझौते में बिहार के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
इस दौरान जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद संजय झा ने बांग्लादेश के साथ जल समझौते का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते के समय बिहार से संवाद नहीं किया गया था. उनके मुताबिक, पिछले 30 वर्षों से पानी बांग्लादेश जा रहा है, जबकि बिहार को बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
संजय झा ने बताया कि संसद में इस मुद्दे को उठाने के बाद विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि 12 दिसंबर को होने वाले नए समझौते में बिहार के हितों का ध्यान रखा जाएगा.
5000 से घटकर 1100 घनमीटर रह गई जल उपलब्धता
संगोष्ठी में जल सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई गई. बताया गया कि जल उपलब्धता 5000 घनमीटर से घटकर करीब 1100 घनमीटर रह गई है. ऐसे में पेयजल, खेती और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए जल प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था करना जरूरी है.
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मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में बिहार में बाढ़ नियंत्रण, गाद प्रबंधन और जल संरक्षण को लेकर दीर्घकालिक रणनीति अपनाई जाएगी. गंगा किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा इसी व्यापक विकास योजना का अहम हिस्सा होगा.


