उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार अब विंध्य क्षेत्र और पूर्वांचल के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है. इसी योजना के तहत विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को हरी झंडी मिलने की जानकारी सामने आई है. प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 100 से 117 किलोमीटर बताई जा रही है. इस पर लगभग 9,000 करोड़ रुपये या इससे अधिक खर्च होने का अनुमान है.
इस परियोजना को छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाने की योजना है. इसके लिए चंदौली, गाजीपुर और मिर्जापुर जिलों के करीब 140 गांवों की जमीन ली जा सकती है. परियोजना के लिए लगभग 1,558 हेक्टेयर भूमि की जरूरत बताई गई है. निर्माण कार्य पूरा होने में करीब ढाई से तीन साल लगने का अनुमान है.
विंध्य क्षेत्र को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा नया लिंक
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का मुख्य उद्देश्य विंध्य क्षेत्र को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ना है. इसके बनने से दोनों क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है.
प्रस्तावित योजना के मुताबिक, यह एक्सप्रेसवे मिर्जापुर के पास मुख्य विंध्य एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा और आगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से इंटरकनेक्ट होगा. इससे अलग-अलग एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के बीच सीधा संपर्क मजबूत हो सकता है.
इस परियोजना को छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाने का खाका तैयार किया जा रहा है. ग्रीनफील्ड परियोजना होने के कारण इसके लिए नए मार्ग और भूमि की जरूरत होगी.
चंदौली, गाजीपुर और मिर्जापुर से होकर गुजरेगा रूट
प्रस्तावित विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के तीन जिलों चंदौली, गाजीपुर और मिर्जापुर से होकर गुजरेगा. परियोजना के लिए इन जिलों के करीब 140 गांवों की जमीन अधिग्रहित किए जाने की योजना है.
स्रोत के अनुसार, प्रभावित किसानों से जमीन अच्छे दामों पर लेने की बात कही गई है. इसके लिए करीब 1,558 हेक्टेयर भूमि की जरूरत पड़ेगी. फिलहाल उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीडा प्रभावित गांवों में सर्वे का काम कर रहा है.
गाजीपुर की तीन तहसीलों के 65 गांव होंगे प्रभावित
इस परियोजना के तहत गाजीपुर जिले में तीन तहसीलों के कुल 65 गांवों से एक्सप्रेसवे गुजरने की जानकारी दी गई है. इनमें सेवराई, जमानिया और मुहम्मदाबाद तहसील शामिल हैं.
गाजीपुर में गांवों का विवरण इस प्रकार बताया गया है:
- सेवराई तहसील: 31 गांव.
- जमानिया तहसील: 23 गांव.
- मुहम्मदाबाद तहसील: 13 गांव.
इस तरह अकेले गाजीपुर जिले में 65 गांव परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं. यूपीडा की ओर से प्रभावित गांवों में सर्वे का काम किया जा रहा है.
माल ढुलाई और औद्योगिक विकास को मिल सकती है रफ्तार
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे बनने से सड़क परिवहन और माल ढुलाई को फायदा मिलने की उम्मीद है. मिर्जापुर और सोनभद्र के खनिज क्षेत्रों से पूर्वांचल तक सामान पहुंचाने में आसानी हो सकती है.
बेहतर सड़क संपर्क से माल ढुलाई का समय और परिवहन खर्च कम होने की संभावना जताई गई है. इसके साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
प्रयागराज, मिर्जापुर, चंदौली और गाजीपुर के बीच यातायात भी सुगम होने की उम्मीद है. इससे इन जिलों के बीच आवागमन करने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है.
विंध्य धाम और धार्मिक स्थलों तक पहुंच होगी आसान
इस एक्सप्रेसवे का फायदा केवल औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है. बेहतर सड़क संपर्क से विंध्य धाम और आसपास के धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है.
परियोजना के जरिए विंध्य क्षेत्र और पूर्वांचल के बीच संपर्क मजबूत होने के साथ बुंदेलखंड के पूर्वांचल से सीधे जुड़ने की भी उम्मीद जताई गई है. इसके अलावा छत्तीसगढ़ और झारखंड के साथ कनेक्टिविटी बेहतर होने की संभावना बताई गई है.
कब तक पूरा होगा एक्सप्रेसवे?
प्रस्तावित परियोजना को पूरा करने में करीब ढाई से तीन साल का समय लगने का अनुमान है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निर्माण शुरू होने और पूरा होने की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है.
फिलहाल परियोजना के लिए भूमि की जरूरत और प्रभावित गांवों में सर्वे का काम प्रमुख चरण हैं. आगे भूमि अधिग्रहण, निर्माण की समय-सीमा और एक्सप्रेसवे के अंतिम रूट से जुड़ी जानकारी सामने आने पर परियोजना की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होगी.
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