Digital Desk: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों की सोच बदलने की शुरुआत कर दी है. जिले के मजिस्ट्रेट पुलकित गर्ग ने अपनी तीन वर्षीय बेटी सिया का दाखिला किसी महंगे प्राइवेट प्ले-स्कूल या कॉन्वेंट में नहीं, बल्कि एक सरकारी आंगनवाड़ी केंद्र में कराकर एक मजबूत संदेश दिया है. अगर सिस्टम पर भरोसा किया जाए, तो सरकारी संस्थान भी बच्चों के भविष्य के लिए पूरी तरह सक्षम हैं.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, डीएम पुलकित गर्ग ने अपनी बेटी सिया को कारवी क्षेत्र के नया बाजार इलाके में स्थित एक सरकारी मिश्रित विद्यालय से जुड़ी आंगनवाड़ी के प्लेग्रुप में दाखिला दिलवाया. उन्होंने खुद विद्यालय का दौरा किया, आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाएं देखीं और करीब चार दिन पहले सामान्य प्रक्रिया के तहत प्रवेश पूरा कराया.
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‘अब हालात पहले जैसे नहीं हैं’ – डीएम पुलकित गर्ग
सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को लेकर समाज में बनी पुरानी धारणा को चुनौती देते हुए डीएम गर्ग ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, ‘हालात अब पहले जैसे नहीं रहे हैं. शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार हुआ है और संसाधनों की कोई कमी नहीं है. अगर एक आईएएस अधिकारी अपने बच्चे को सरकारी संस्थान में पढ़ा सकता है, तो आम माता-पिता को संकोच नहीं करना चाहिए.’
उनका मानना है कि बीते कुछ वर्षों में सरकारी शिक्षा संस्थानों में बुनियादी ढांचे, शिक्षण सामग्री, पोषण और देखभाल से जुड़ी सुविधाओं में बड़ा सुधार हुआ है. यही वजह है कि अब सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को पुराने नजरिए से देखना सही नहीं है.
शुरुआती उम्र में क्या जरूरी है? डीएम ने गिनाईं प्राथमिकताएं
डीएम गर्ग ने इस बात पर खास जोर दिया कि बच्चे के शुरुआती वर्षों में केवल किताबी पढ़ाई सबसे अहम नहीं होती.
उनके मुताबिक, इस उम्र में पोषण, स्वास्थ्य, संस्कार और सुरक्षित माहौल सबसे बड़ी जरूरत होती है, और आंगनवाड़ी केंद्र इन सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ देखभाल, सुरक्षा और सामाजिक मूल्य भी मिलते हैं, जो उनके मानसिक और सामाजिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई DM की बेटी सिया
आंगनवाड़ी में दाखिले के बाद सिया के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. वायरल वीडियो में सिया को खिलौनों से खेलते, शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेते और अन्य बच्चों के साथ कविताओं पर नाचते-गाते देखा जा सकता है.
इन वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा है और बड़ी संख्या में यूजर्स डीएम के फैसले की तारीफ कर रहे हैं. कई लोग इसे ‘सरकारी शिक्षा पर विश्वास की सबसे मजबूत मिसाल’ बता रहे हैं.
बढ़ने लगा सरकारी आंगनवाड़ी पर भरोसा
डीएम गर्ग के इस कदम का असर ज़मीनी स्तर पर भी दिखने लगा है. स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अनुसार, उनके फैसले के बाद कई अभिभावक अपने बच्चों के नामांकन को लेकर आंगनवाड़ी केंद्र से संपर्क कर रहे हैं.
अभिभावकों का कहना है कि जब जिले का शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चे को सरकारी संस्थान में पढ़ा रहा है, तो इससे भरोसा बढ़ता है और झिझक कम होती है.
पहली पोस्टिंग में ही पहचान बना चुके हैं पुलकित गर्ग
पुलकित गर्ग वर्तमान में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी पहली पोस्टिंग पर हैं और चित्रकूट में उन्हें केवल चार महीने ही हुए हैं. इस कम समय में ही उन्होंने जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर उल्लेखनीय काम कर पहचान बनाई है. अब उनकी बेटी का आंगनवाड़ी में दाखिला न सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला, बल्कि एक सामाजिक संदेश बन चुका है.
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सार्वजनिक शिक्षा तभी मजबूत होगी, जब भरोसा दिखेगा
डीएम गर्ग का यह कदम यह साफ करता है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केवल योजनाएं ही नहीं, बल्कि भरोसा भी जरूरी है. जब समाज का हर वर्ग, खासकर प्रशासनिक अधिकारी, सरकारी संस्थानों पर विश्वास दिखाएंगे, तभी सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली वास्तव में सशक्त बन सकेगी.
चित्रकूट से उठी यह पहल अब प्रदेश और देश के लिए एक उदाहरण बनती नजर आ रही है, जहां बदलाव की शुरुआत भरोसे से होती है.


