Dharm Desk: हिंदू धर्म में भगवान शिव की मूर्ति और चित्रों में उनके गले में लिपटा सांप एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है. शिवजी के इस स्वरूप ने सदियों से श्रद्धालुओं और विद्वानों के मन में जिज्ञासा पैदा की है कि आखिर उनके गले में जो नाग विराजमान है, उसका क्या अर्थ है और शास्त्रों में उसके बारे में क्या कहा गया है.
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के गले में जो सर्प सुशोभित रहता है, उसे वासुकी नाग कहा जाता है. वासुकी वही नागराज हैं जिनका उल्लेख समुद्र मंथन की कथा में भी मिलता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और दानवों द्वारा समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग को ही रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया था. बाद में भगवान शिव ने उन्हें अपने गले में धारण कर लिया.
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Shiva Purana में वर्णन मिलता है कि भगवान शिव ने सर्प को आभूषण के रूप में धारण किया है. इसका आध्यात्मिक अर्थ यह बताया जाता है कि शिव भय, मृत्यु और विष जैसे तत्वों पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं. सांप, जो सामान्यतः भय और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है, वह शिव के गले में विराजमान होकर यह संदेश देता है कि जो शिव की शरण में है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता.
क्या कहना है कानपुर के प्रसिद्ध धर्माचार्य पंडित दिनेश का
कानपुर के प्रसिद्ध धर्माचार्य पंडित दिनेश के अनुसार, भगवान शिव के गले में वासुकी नाग का होना केवल एक अलंकरण नहीं है, बल्कि यह गहरा दार्शनिक संदेश देता है. शिव संहार के देवता हैं, लेकिन वे करुणा और संतुलन के भी प्रतीक हैं. नाग ऊर्जा, कुंडलिनी शक्ति और समय के चक्र का भी प्रतिनिधित्व करता है. शिव द्वारा नाग को धारण करना यह दर्शाता है कि वे काल और प्रकृति दोनों पर नियंत्रण रखते हैं.
सर्प शिव की वैराग्य भावना का प्रतीक
पंडित दिनेश आगे बताते हैं कि शिवपुराण में यह भी उल्लेख है कि सर्प शिव की वैराग्य भावना का प्रतीक है. जहां सामान्य व्यक्ति सर्प से भयभीत होता है, वहीं शिव उसे गले में धारण कर यह बताते हैं कि आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर भय का कोई स्थान नहीं है. नाग का शिव के गले में लिपटा होना जीवन और मृत्यु के चक्र को स्वीकार करने का संकेत भी माना जाता है.
धार्मिक मान्यताओं में वासुकी नाग को शिव का परम भक्त भी माना गया है. कुछ कथाओं के अनुसार, वासुकी ने स्वयं शिव की सेवा का संकल्प लिया था, जिसके बाद उन्हें यह स्थान प्राप्त हुआ. इस प्रकार भगवान शिव के गले का सांप केवल एक पौराणिक कथा का हिस्सा नहीं बल्कि गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थों से जुड़ा प्रतीक है, जो भक्तों को निर्भयता, संतुलन और वैराग्य का संदेश देता है.
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डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है. इसकी सटीकता के लिए रीड मी लाउड उत्तरदायी नहीं है.


