Ayodhya News: अयोध्या स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में उस समय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला, जब कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय परिवार के लिए विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया. स्थानीय अवध मॉल के सिनेमा हॉल में अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने एक साथ पौराणिक एवं सांस्कृतिक फिल्म कृष्णावतारम भाग 1: हृदयम का सामूहिक प्रदर्शन देखा. भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित इस फिल्म ने उपस्थित लोगों को अपनी जड़ों, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया.
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“कृष्ण केवल भगवान नहीं, जगद्गुरु हैं”
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व सार्वभौमिक है. “कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय, कूटनीति, प्रेम और धर्म स्थापना की जीवंत प्रेरणा हैं. उन्होंने कहा कि धर्मयुद्ध के माध्यम से श्रीकृष्ण ने न्यायपूर्ण शासन का जो संदेश दिया, वह सदियों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा. कुलपति ने यह भी कहा कि ‘कृष्णावतारम’ जैसी फिल्में भारतीय जीवन दर्शन और नैतिक मूल्यों को जीवंत रूप में सामने लाती हैं.
‘यतो धर्मस्ततो जयः’ का संदेश
कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने भारतीय दर्शन के मूल वाक्य “यतो धर्मस्ततो जयः” पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब भी समाज में असंतुलन पैदा होता है, तब ज्ञान और शक्ति का संतुलन उसे पुनः स्थापित करता है. उन्होंने कहा कि फिल्म श्रीमद्भगवद्गीता के सिद्धांत “परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्” को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है.
द्वारिका की भव्यता और प्राचीन विज्ञान की झलक
फिल्म के तकनीकी और ऐतिहासिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने कहा कि द्वारिका का इतिहास यह साबित करता है कि प्राचीन भारत की स्थापत्य कला समुद्री चुनौतियों और शहरी नियोजन के गहरे ज्ञान पर आधारित थी. उन्होंने बताया कि द्वारिका की वास्तुकला पंचभूत पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के अद्भुत संतुलन का प्रतीक है.
नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ती फिल्म
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने कहा कि यह फिल्म आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति में स्त्री सम्मान, आदर्श जीवन मूल्यों और द्वारिकापुरी के वैभव से परिचित कराएगी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में दशावतार की अवधारणा आधुनिक विकासवाद सिद्धांत से भी व्यापक और प्राचीन मानी जाती है, जो जीवन की विकास यात्रा को बेहद खूबसूरती से दर्शाती है.
‘सत्यभामा’ के नजरिए से दिखा श्रीकृष्ण का हृदय
प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि लेखक-निर्देशक हार्दिक गज्जर की यह फिल्म सत्यभामा पर आधारित है. फिल्म पारंपरिक कथाओं से हटकर सत्यभामा के दृष्टिकोण से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को प्रस्तुत करती है. इसमें राधा के साथ रुक्मिणी, सत्यभामा और जामवंती के प्रसंगों के जरिए कृष्ण के प्रेम, करुणा और हृदय को गहराई से दिखाया गया है.
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बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी रहे मौजूद
इस विशेष अवसर पर वित्त अधिकारी पूर्णेन्दु शुक्ल, प्रो. एस एस मिश्र, प्रो. आशुतोष सिन्हा, प्रो. सी के मिश्र, प्रो. फर्रुख जमाल, डॉ. ए के गौतम, डॉ. रीमा श्रीवास्तव, डॉ. पी के द्विवेदी, प्रो. सुरेन्द्र मिश्र, डॉ. गीतिका श्रीवास्तव, डॉ. राजेश कुमार सिंह, गिरीश पंत और आशीष मिश्रा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे. विश्वविद्यालय की यह पहल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने शिक्षकों और कर्मचारियों को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और गौरवशाली विरासत के प्रति नई चेतना और गर्व का अनुभव भी कराया.


