बॉलीवुड अभिनेता Ranveer Singh इन दिनों ‘डॉन 3’ विवाद को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. फिल्म से अचानक बाहर होने की खबरों के बाद फिल्म इंडस्ट्री की संस्था FWICE यानी Federation of Western India Cine Employees ने उनके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी कर दिया था. अब इस पूरे मामले में निर्देशक Sanjay Gupta की एंट्री ने विवाद को और गर्मा दिया है. FWICE ने रणवीर का समर्थन करने वाले संजय गुप्ता के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
क्या है पूरा विवाद?
रिपोर्ट्स के मुताबिक Farhan Akhtar की फिल्म ‘Don 3’ से रणवीर सिंह के अचानक बाहर होने के बाद विवाद शुरू हुआ. FWICE का कहना है कि फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके थे और अभिनेता के फैसले से निर्माताओं को बड़ा नुकसान हुआ. संस्था ने दावा किया कि रणवीर सिंह को कई बार जवाब देने के लिए नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली.
इसके बाद FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी किया. हालांकि बाद में संस्था ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह “बैन” नहीं बल्कि सहयोग न करने की सलाह है.
संजय गुप्ता ने क्या कहा?
निर्देशक संजय गुप्ता ने सोशल मीडिया पर FWICE के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि किसी बड़े अभिनेता पर रोक लगाने का असर सिर्फ उस स्टार पर नहीं बल्कि सैकड़ों फिल्म वर्कर्स की रोजी-रोटी पर भी पड़ता है.
संजय गुप्ता ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब कोई बड़ा अभिनेता शूटिंग करता है तो सेट पर 300 से ज्यादा लोग काम करते हैं. ऐसे में किसी स्टार को रोकना असल में उन कर्मचारियों के काम को प्रभावित करना है जो रोज कमाकर अपना घर चलाते हैं.
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसके बाद इंडस्ट्री के अंदर बहस और तेज हो गई.
FWICE क्यों हुआ नाराज?
FWICE ने संजय गुप्ता की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संस्था का फैसला नियमों और प्रक्रिया के तहत लिया गया है. संगठन ने यह भी याद दिलाया कि पहले भी कुछ मामलों में इंडस्ट्री अनुशासन को लेकर सख्त कदम उठाए गए थे.
रिपोर्ट्स के अनुसार FWICE ने यह भी संकेत दिया कि संजय गुप्ता खुद पहले संस्था से जुड़े विवादों का हिस्सा रह चुके हैं. संस्था का कहना है कि किसी भी कलाकार या निर्देशक से ऊपर इंडस्ट्री के नियम और पेशेवर प्रतिबद्धता होती है.
‘डॉन 3’ को कितना हुआ नुकसान?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर लगभग 45 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा चुके थे. लोकेशन प्लानिंग, इंटरनेशनल शूट शेड्यूल और अन्य तैयारियों पर पहले ही बड़ी रकम खर्च होने की बात कही जा रही है.
इसी वजह से यह मामला केवल कास्टिंग बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंडस्ट्री अनुशासन और कॉन्ट्रैक्ट जिम्मेदारियों का मुद्दा बन गया.
रणवीर सिंह की तरफ से क्या कहा गया?
रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह की टीम ने FWICE को जवाब देते हुए कहा कि यह मामला संस्था के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. बाद में अभिनेता की ओर से बातचीत की कोशिश भी बताई गई, लेकिन विवाद पूरी तरह शांत नहीं हो पाया.
हालांकि रणवीर सिंह ने अब तक इस पूरे विवाद पर विस्तार से सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर लोगों की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है. कुछ लोग FWICE के फैसले को सही बता रहे हैं और मानते हैं कि बड़े कलाकारों को भी पेशेवर जिम्मेदारियां निभानी चाहिए. वहीं कई यूजर्स का कहना है कि किसी अभिनेता के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से इंडस्ट्री के दूसरे कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है.
रेडिट और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग इस विवाद को “स्टार बनाम सिस्टम” की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं.
बॉलीवुड में पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब किसी अभिनेता और इंडस्ट्री संगठन के बीच टकराव देखने को मिला हो. इससे पहले भी कई कलाकारों को लेकर बहिष्कार, नॉन-कोऑपरेशन और विवाद जैसी स्थितियां सामने आती रही हैं. हालांकि ज्यादातर मामलों में बाद में बातचीत के जरिए समाधान निकाल लिया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि बॉलीवुड जैसे बड़े उद्योग में कलाकारों, निर्माताओं और तकनीकी कर्मचारियों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है.
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अब आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल इंडस्ट्री की नजर इस बात पर टिकी है कि रणवीर सिंह और FWICE के बीच बातचीत होती है या नहीं. यदि दोनों पक्ष आपसी समाधान निकाल लेते हैं तो मामला जल्द शांत हो सकता है. वहीं ‘Don 3’ की कास्टिंग और भविष्य को लेकर भी चर्चाएं लगातार जारी हैं.
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े सितारों के फैसलों का असर पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ता है और ऐसे मामलों में संतुलन कैसे बनाया जाना चाहिए.


