NCR Master Plan 2041: अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और रोज़ाना के ट्रैफिक जाम, भीड़भाड़ और लंबे सफर से परेशान हैं, तो आने वाले साल आपके लिए बड़ी राहत लेकर आ रहे हैं. ‘एनसीआर मास्टर प्लान 2041’ के तहत पूरे रीजन का कायाकल्प करने की तैयारी चल रही है. इस महायोजना में नए हाई-टेक शहर बसाने से लेकर सफर के समय को बेहद कम करने का एक शानदार खाका तैयार किया गया है.
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दिल्ली पर दबाव होगा कम, बसेंगे 5 से 8 नए शहर
मास्टर प्लान 2041 के ड्राफ्ट के मुताबिक, एनसीआर क्षेत्र में 5 से 8 नए ‘ग्रीनफील्ड शहर’ (पूरी तरह नए सिरे से विकसित होने वाले शहर) बसाने का प्रस्ताव है. इन शहरों को बसाने का मुख्य मकसद दिल्ली पर लगातार बढ़ रहे आबादी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बोझ को कम करना है. ये सभी शहर आधुनिक सुख-सुविधाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट से लैस होंगे.
30 मिनट का विजन: सुपरफास्ट कनेक्टिविटी पर जोर
इस योजना का सबसे दिलचस्प हिस्सा है सफर के समय को घटाना. सरकार का लक्ष्य है कि एनसीआर के प्रमुख हिस्सों से दिल्ली पहुंचना बेहद आसान हो जाए. इसके लिए ट्रांसपोर्ट को तीन स्तरों पर प्लान किया गया है:
सुपरफास्ट रेल नेटवर्क: इसके जरिए एनसीआर के मुख्य शहरों से दिल्ली की दूरी को महज 30 मिनट में समेटने का लक्ष्य है.
सामान्य रेल सेवाएं: अन्य एक्सप्रेस रेल सेवाओं के माध्यम से सफर का समय अधिकतम 60 मिनट रखने का प्रस्ताव है.
सड़क मार्ग: प्रमुख एक्सप्रेसवे के जरिए एनसीआर के शहरों से दिल्ली की दूरी 2 से 3 घंटे की होगी. भविष्य में भीड़भाड़ से बचने के लिए ‘हेली-टैक्सी’ जैसे आधुनिक विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है.
पंचग्राम और यमुना एक्सप्रेसवे के पास नई टाउनशिप
मास्टर प्लान में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के लिए नए हब बनाने का सुझाव है. हरियाणा में केएमपी (KMP) एक्सप्रेसवे और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के किनारे “पंचग्राम” नाम से पांच नए शहर विकसित करने की योजना है. उत्तर प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) के आसपास बड़े ग्रीनफील्ड शहरी क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिन्हें सीधे प्रमुख रेल और सड़क कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा.
पुराने इलाकों का होगा कायाकल्प (पुनर्विकास)
योजना सिर्फ नया बसाने तक सीमित नहीं है. दिल्ली और एनसीआर के जो इलाके पहले से बसे हुए हैं (ब्राउनफील्ड एरिया), उनके पुनर्विकास (Redevelopment) पर भी जोर दिया जाएगा. इससे कम जमीन में बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी और शहरी अव्यवस्था को सुधारा जा सकेगा.
कैंपस के अंदर ही मिलेंगे घर
दैनिक आवागमन यानी डेली अप-डाउन के दबाव को कम करने के लिए एक अनोखा सुझाव दिया गया है. इसके तहत बड़े विश्वविद्यालयों, औद्योगिक परिसरों और संस्थानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कुल जमीन के 15 से 20 फीसदी हिस्से पर हॉस्टल, अपार्टमेंट या ट्रांजिट हाउसिंग बनाएं, ताकि उनके कर्मचारी और छात्र कैंपस के पास ही रह सकें.
20 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत
अनुमान है कि अगले 15 सालों में एनसीआर की आबादी में 3 करोड़ से ज्यादा नए लोग जुड़ जाएंगे. इस भारी-भरकम आबादी की पानी, बिजली, मकान और ट्रांसपोर्ट की जरूरतों को पूरा करने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी.
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क्या यह प्लान लागू हो गया है?
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘मास्टर प्लान 2041’ एक लंबी अवधि की क्षेत्रीय योजना है. इसमें शामिल अधिकांश प्रस्ताव अभी प्लानिंग और सुझावों के स्तर पर हैं. इन प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने के लिए केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों (यूपी, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली) और स्थानीय निकायों की मंजूरी के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से भारी निवेश की जरूरत होगी.


