नई दिल्ली: 21 जून को 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Day of Yoga 2026) दुनिया भर में उत्साह और व्यापक भागीदारी के साथ मनाया गया. इस वर्ष योग दिवस की थीम “Yoga for Healthy Ageing” रखी गई, जिसका उद्देश्य लोगों को स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है. भारत सहित कई देशों में सामूहिक योग सत्र, जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक आयोजन आयोजित किए गए.
संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त यह वैश्विक आयोजन अब दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में शामिल हो चुका है. योग दिवस के अवसर पर लाखों लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई.
इस वर्ष की थीम क्यों है खास
आयुष मंत्रालय के अनुसार 2026 की थीम “Yoga for Healthy Ageing” तेजी से बढ़ती वैश्विक वृद्ध आबादी और बेहतर जीवन गुणवत्ता की आवश्यकता को ध्यान में रखकर चुनी गई है. यह थीम बताती है कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि ऐसा समग्र अभ्यास है जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में मदद करता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योगाभ्यास से लचीलापन, संतुलन, मानसिक एकाग्रता और श्वसन क्षमता बेहतर होती है. बढ़ती उम्र में यह स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने और सक्रिय जीवनशैली बनाए रखने में सहायक हो सकता है.
भारत में भव्य आयोजन
भारत में योग दिवस के मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता में किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल का पालन करते हुए योगाभ्यास किया. देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों, सेना, अर्धसैनिक बलों और सामाजिक संगठनों ने भी विशेष योग कार्यक्रम आयोजित किए.
कई राज्यों में सप्ताह भर योग जागरूकता अभियान चलाए गए. विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों पर भी योग सत्र आयोजित किए गए ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें.
दुनियाभर में दिखा योग का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल भारत तक सीमित नहीं रहा. एशिया, यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में भारतीय दूतावासों, स्थानीय संस्थाओं और योग संगठनों ने बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए. विभिन्न देशों में लोगों ने सार्वजनिक पार्कों, सामुदायिक केंद्रों और सांस्कृतिक स्थलों पर योगाभ्यास किया.
योग आज वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का हिस्सा बन चुका है और इसे शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक शांति तथा तनाव प्रबंधन के प्रभावी माध्यम के रूप में देखा जा रहा है.
वैज्ञानिक शोध भी कर रहे हैं समर्थन
आयुष मंत्रालय ने बताया है कि पिछले एक दशक में स्वस्थ वृद्धावस्था और योग पर वैज्ञानिक शोधों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. विभिन्न अध्ययनों में योग को मानसिक स्वास्थ्य, गतिशीलता, संतुलन, तनाव नियंत्रण और समग्र जीवन गुणवत्ता में सुधार से जोड़ा गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि योग न केवल जीवनकाल बढ़ाने बल्कि “हेल्थस्पैन” यानी स्वस्थ जीवन के वर्षों को बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है.
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योग को जनआंदोलन बनाने पर जोर
आयुष मंत्रालय लगातार “Yoga 365” जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को पूरे वर्ष योग अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है. सरकार का उद्देश्य योग को केवल एक दिन का आयोजन नहीं बल्कि दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है.
योग दिवस 2026 का संदेश स्पष्ट है कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन के लिए योग एक सरल, सुलभ और प्रभावी साधन है. बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच योग दुनिया भर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में जोड़ने का काम कर रहा है.
स्रोत. न्यूज़ ऑन एयर, आयुष मंत्रालय, संयुक्त राष्ट्र.


