पंजाब के माझा क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात के रूप में केंद्र सरकार ने लंबे समय से लंबित कादियां-ब्यास नई रेल लाइन परियोजना को पुनर्जीवित करने का फैसला किया है. रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस ऐतिहासिक परियोजना की घोषणा करते हुए कहा कि यह रेल लिंक क्षेत्र में संपर्क, पर्यटन और आर्थिक विकास को नई गति देगा. लगभग एक सदी पहले शुरू हुई यह योजना अब आधुनिक स्वरूप में फिर से साकार होने जा रही है.
39.68 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर 1,400 करोड़ रुपये खर्च
प्रस्तावित कादियां-ब्यास ब्रॉडगेज रेल लाइन की लंबाई लगभग 39.68 किलोमीटर होगी और इसकी अनुमानित लागत करीब 1,400 करोड़ रुपये तय की गई है. इस परियोजना का निर्माण उत्तरी रेलवे द्वारा किया जाएगा.
नई रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी. यह मार्ग कादियां, धपाई, घुमान, बुटाला, सठियाला और ब्यास जैसे महत्वपूर्ण कस्बों और गांवों से होकर गुजरेगा. इससे माझा क्षेत्र के कई इलाकों को पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिलेगा.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा रेल मार्ग
परियोजना के तहत अत्याधुनिक रेलवे अवसंरचना विकसित की जाएगी. इसमें घुमान और बुटाला में दो क्रॉसिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इसके अलावा 11 बड़े पुल, 121 छोटे पुल, 54 रोड अंडर ब्रिज (RUB), आधुनिक सिग्नलिंग एवं दूरसंचार प्रणाली और स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली “कवच” को भी शामिल किया जाएगा.
रेल मंत्रालय का मानना है कि इन सुविधाओं से यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बनेगी.
ब्रिटिश काल से जुड़ा है परियोजना का इतिहास
कादियां-ब्यास रेल लिंक का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना है. इस परियोजना को वर्ष 1928-29 में तत्कालीन नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे द्वारा मंजूरी दी गई थी. 1930 के दशक में इसका काफी निर्माण कार्य भी पूरा हो गया था, लेकिन बाद में परिस्थितियों और विकास प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण इसे बंद कर दिया गया.
बाद में इसे सामाजिक रूप से वांछनीय रेल संपर्क परियोजना (SDRCP) के रूप में पुनर्जीवित किया गया और वर्ष 2010-11 के पूरक रेल बजट में शामिल किया गया. हालांकि विभिन्न प्रशासनिक और प्रक्रियागत कारणों से यह आगे नहीं बढ़ सकी. अब केंद्र सरकार ने संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के साथ इसे फिर से मंजूरी देने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
संपर्क और अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
नई रेल लाइन से पंजाब के माझा क्षेत्र में कृषि, व्यापार और पर्यटन को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे और माल परिवहन की लागत कम हो सकती है.
इसके साथ ही व्यापार, लघु उद्योग, लॉजिस्टिक्स और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. परियोजना के निर्माण और संचालन दोनों चरणों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.
यह रेल मार्ग आपातकालीन परिस्थितियों में अमृतसर-पठानकोट रेलखंड के वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी काम करेगा, जिससे रेलवे नेटवर्क की क्षमता और मजबूती बढ़ेगी.
धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
कादियां-ब्यास रेल परियोजना कई प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों तक पहुंच को आसान बनाएगी. इनमें कादियां स्थित अहमदिया मुस्लिम समुदाय का प्रमुख केंद्र, डेरा बाबा जैमल सिंह ब्यास, डेरा बाबा नानक, गुरुद्वारा अचल साहिब, गुरुद्वारा भक्त नामदेव जी घुमान, गुरुद्वारा साहिब पातशाही पंजवीं, पंडोरी धाम, राम शरणम मंदिर और शिरडी साईं मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं.
बेहतर रेल संपर्क से देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा.
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समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य
राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि केंद्र सरकार परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक स्वीकृतियां जल्द प्राप्त कर इसके समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कादियां, ब्यास, घुमान, बुटाला, सठियाला और पूरे माझा क्षेत्र के लोगों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी.
करीब 100 वर्षों बाद पुनर्जीवित हुई यह परियोजना पंजाब के रेलवे इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रही है और आने वाले वर्षों में क्षेत्र के विकास की नई तस्वीर पेश कर सकती है.
स्रोत: Ministry Of Railways


