Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक बनने वाला गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत के बीच कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने जा रहा है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से करीब 37,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह ग्रीनफील्ड 4-लेन एक्सप्रेसवे यात्रा का समय कम करने के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक विकास को भी नई रफ्तार देगा.
गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक बनेगा हाईस्पीड कॉरिडोर
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जगदीशपुर रिंग रोड से शुरू होगा. इसके बाद कुशीनगर के तमकुहीराज से बिहार में प्रवेश करेगा और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर होते हुए दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (NH-27) से जुड़ेगा. इस परियोजना का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा. इसके दायरे में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे जिले आएंगे.
20 बड़े शहरों को मिलेगा फायदा
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर भारत को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर बनेगा. इसके जरिए गोरखपुर, सिलीगुड़ी और आगे गुवाहाटी समेत करीब 20 बड़े शहरों के बीच तेज और बेहतर सड़क संपर्क स्थापित होगा. फिलहाल दिल्ली से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 24 से 28 घंटे का समय लगता है. एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी लगभग 200 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय घटकर 15 से 16 घंटे रह जाने का अनुमान है. वहीं, गोरखपुर से सिलीगुड़ी का सफर भी करीब 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा.
व्यापार और किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
यह एक्सप्रेसवे भारत-नेपाल सीमा के समानांतर विकसित किया जा रहा है. इसके चालू होने से उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. मोतिहारी, बेतिया, सुपौल और अररिया जैसे क्षेत्रों के किसान और व्यापारी अपने उत्पादों को कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
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क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच आर्थिक, औद्योगिक और लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर साबित होगा.


