Amroha-Haridwar Ganga Expressway: अमरोहा जिले की महत्वाकांक्षी अमरोहा-हरिद्वार गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ रही है. जनपद की दो तहसीलों के 62 गांवों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे का सर्वे कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है. वर्तमान में ज़मीनों के गाटा संख्या के सत्यापन का काम अंतिम चरण में है, जिसके पूरे होते ही भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. मुख्यमंत्री द्वारा इस परियोजना में तेज़ी लाने के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज़ हो गई हैं.
सर्किल रेट और गाटा संख्या का ब्योरा तलब
हाल ही में एआईजी स्टांप कार्यालय (AIG Stamp Office) ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (SLO) को एक पत्र भेजकर अधिगृहीत की जाने वाली ज़मीनों का विस्तृत ब्योरा मांगा है. पत्र में संबंधित गांवों की गाटा संख्या, अधिग्रहण के तहत आने वाला क्षेत्रफल और भूमि का वर्तमान सर्किल रेट शामिल है. इन आंकड़ों का विश्लेषण करके ज़मीनों का सटीक मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके आधार पर प्रभावित किसानों के मुआवजे की राशि तय की जाएगी.
एक्सप्रेसवे की मुख्य बातें और लाभ
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 116.85 किलोमीटर है. इसका लगभग 44 किलोमीटर हिस्सा अमरोहा ज़िले से होकर गुज़रेगा. यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज-मेरठ गंगा एक्सप्रेसवे के मंगरौला टी-प्वाइंट से शुरू होकर सीधे हरिद्वार तक जाएगा. अमरोहा से हरिद्वार का सफर आसान होगा और यात्रा के समय में भारी कमी आएगी. जिले को दूसरे एक्सप्रेसवे की सौगात मिलने से औद्योगिक विकास, निवेश, व्यापार और पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा.
बाज़ार दर से मिले चार गुना मुआवजा
परियोजना को गति मिलने के साथ ही किसानों ने मुआवजे को लेकर अपनी आवाज़ बुलंद कर दी है. भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों ने हाल ही में मुरादाबाद में कमिश्नर से मुलाकात की. किसानों की मुख्य मांग है कि अधिग्रहीत की जाने वाली जमीनों का मुआवजा मौजूदा बाजार दर (Market Rate) से चार गुना दिया जाए.
चुनौती और उम्मीद
इस परियोजना की सफलता काफी हद तक समयबद्ध भूमि अधिग्रहण, पारदर्शी प्रक्रिया, किसानों को उचित मुआवजे के भुगतान और उनकी आपत्तियों के त्वरित निस्तारण पर निर्भर करेगी. गाटा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने की पूरी संभावना है.


