प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना ‘गोवर्धन’ को मंजूरी दे दी है. सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से देश में संपीड़ित बायोगैस (CBG) के घरेलू उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाना, निजी निवेश को आकर्षित करना और चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह योजना स्वच्छ ऊर्जा, ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि गोवर्धन योजना से देश में CBG उत्पादन को नई गति मिलेगी.
उन्होंने कहा कि इससे निवेश और नवाचार के लिए मजबूत एवं स्थिर पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा. योजना का लाभ किसानों, सहकारी समितियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), महिला उद्यमियों और ग्रामीण उद्यमों तक पहुंचने की उम्मीद है.
कृषि अवशेष और जैविक कचरे से बनेगा ईंधन
योजना के तहत कृषि अवशेष, गोबर, प्रेस मड (गन्ने की मैली), नगर निकायों के जैविक कचरे और अन्य जैव-द्रव्यमान संसाधनों का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन, जैविक खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे.
सरकार का कहना है कि इससे वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
2035-36 तक लागू रहेगी योजना
गोवर्धन योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू की जाएगी.
इस दौरान CBG उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आवश्यक अवसंरचना और आपूर्ति तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा.
CBG उत्पादन को 10 गुना बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य देश में घरेलू CBG उत्पादन को लगभग दस गुना तक बढ़ाना है.
इसके साथ बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित करने और पूरे देश में चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा.
मांग और मूल्य निर्धारण को मिलेगा समर्थन
योजना के तहत CBG क्षेत्र को स्थिर मांग, लाभकारी मूल्य निर्धारण, पूंजी सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना, ऋण सहायता और प्रौद्योगिकी विकास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है.
सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों और परियोजना डेवलपर्स को अधिक निश्चितता मिलेगी.
200 से अधिक CBG संयंत्र पहले ही स्थापित
सरकार ने बताया कि पूर्व में चलाई गई विभिन्न योजनाओं के माध्यम से देश में 200 से अधिक CBG संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं.
इन पहलों के जरिए उत्पादन, जैविक खाद की मूल्य श्रृंखला और विभिन्न क्षेत्रों में CBG की व्यवहारिक क्षमता को विकसित किया गया है.
एकीकृत CBG मूल्य श्रृंखला तैयार होगी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित यह योजना संपूर्ण CBG मूल्य श्रृंखला के लिए एकीकृत मंच उपलब्ध कराएगी.
इससे परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन, बेहतर परियोजना अर्थशास्त्र और निवेशकों, ऋणदाताओं तथा डेवलपर्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होने की उम्मीद है.
प्राकृतिक गैस की मांग पूरी करने में मिलेगी मदद
सरकार के अनुसार परिवहन, घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की बढ़ती मांग को पूरा करने में घरेलू स्तर पर उत्पादित CBG महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
CBG रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समान है और इसे मौजूदा गैस वितरण प्रणाली में आसानी से शामिल किया जा सकता है.
गांवों में रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
सरकार का कहना है कि प्रत्येक CBG संयंत्र कृषि अवशेषों और अन्य जैविक संसाधनों के आधार पर स्थानीय चक्रीय अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद करेगा.
इससे फीडस्टॉक आपूर्ति, परिवहन, संयंत्र संचालन और जैविक खाद उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे.
CBG के लिए सुनिश्चित बाजार की व्यवस्था
गोवर्धन योजना के तहत CBG उत्पादकों के लिए समर्पित ऑफटेक एश्योरेंस ढांचा तैयार किया गया है.
सिटी गैस वितरण कंपनियों द्वारा खरीद के माध्यम से CNG और PNG क्षेत्रों में CBG दायित्वों को पूरा किया जाएगा.
सरकार ने CBG मिश्रण दायित्व का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत निर्धारित किया है.


