भिलाई: दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना अब सिर्फ बस्तर को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली योजना नहीं रह गई है. करीब 95 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की ओर से करीब 1,735 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है. रावघाट तक रेल पहुंचने के बाद यहां के लौह अयस्क को भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) तक पहुंचाने के लिए मजबूत और भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था तैयार होगी. यही वजह है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में बीएसपी के लिए कच्चे माल की बड़ी जीवनरेखा बन सकती है.
दल्लीराजहरा के बाद अब रावघाट पर टिकी उम्मीदें
भिलाई इस्पात संयंत्र की शुरुआत से ही दल्लीराजहरा की खदानें लौह अयस्क का प्रमुख स्रोत रही हैं. दशकों से लगातार खनन के चलते वहां उच्च गुणवत्ता वाले अयस्क पर दबाव बढ़ा है. वहीं, बीएसपी के विस्तार के साथ आने वाले समय में लौह अयस्क की जरूरत और बढ़ने वाली है. ऐसे में रावघाट बीएसपी के लिए नए और महत्वपूर्ण अयस्क स्रोत के रूप में सामने आया है.
रावघाट से बड़ी मात्रा में अयस्क को भिलाई तक पहुंचाने के लिए रेल कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए परियोजना में बड़ा निवेश किया गया है. पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 1,880 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है. इसमें रेल लाइन के अलावा स्टेशन निर्माण और विद्युतीकरण जैसे काम भी शामिल हैं.
149 करोड़ का बेनेफिशिएशन प्लांट
दल्लीराजहरा के अयस्क की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बीएसपी तकनीकी उपाय भी कर रहा है. निम्न ग्रेड के लौह अयस्क के इस्तेमाल को बेहतर बनाने के लिए करीब 149 करोड़ रुपये की लागत से बेनेफिशिएशन प्लांट लगाया गया है. इसका उद्देश्य उपलब्ध अयस्क की गुणवत्ता में सुधार कर संयंत्र की कच्चे माल की जरूरत को पूरा करना है.
हालांकि, बीएसपी के भविष्य के विस्तार और बढ़ती उत्पादन क्षमता को देखते हुए नए अयस्क स्रोत की आवश्यकता बनी हुई है. ऐसे में रावघाट का महत्व और बढ़ जाता है.
पहाड़, जंगल और माओवाद… आसान नहीं था रेल लाइन का सफर
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन का निर्माण कई चुनौतियों के बीच हुआ है. करीब 95 किलोमीटर का यह रेल मार्ग दुर्गम पहाड़ी और घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है. लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों के कारण निर्माण एजेंसियों, मजदूरों और सुरक्षा बलों के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती रही.
अब क्षेत्र में हालात बदलने के साथ विकास परियोजनाओं की रफ्तार भी बढ़ी है. रावघाट तक रेल का पहुंचना इसी बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है.
ताड़ोकी तक यात्री सेवा शुरू, रावघाट के लिए तैयारी तेज
दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक यात्री रेल सेवा वर्ष 2022 में शुरू हो चुकी है. इससे स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के लिए आवागमन का नया विकल्प मिला. अब ताड़ोकी-रावघाट खंड पर यात्री परिचालन की दिशा में तैयारियां तेज हैं. 17 जून 2026 को 58 वैगन वाली बॉक्सएन रेक से इस रूट पर तकनीकी परीक्षण किया गया था. इसके बाद सीआरएस निरीक्षण और स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है.
रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से रावघाट से लौह अयस्क को दल्लीराजहरा होते हुए भिलाई तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और अयस्क की ढुलाई को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है.
बीएसपी के भविष्य से जुड़ी है परियोजना
भिलाई इस्पात संयंत्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं के लिए कच्चे माल की स्थायी उपलब्धता महत्वपूर्ण है. उत्पादन बढ़ने के साथ लौह अयस्क की जरूरत भी बढ़ेगी. ऐसे में दल्लीराजहरा के साथ रावघाट को नए स्रोत के रूप में विकसित करना बीएसपी की दीर्घकालिक कच्चे माल की जरूरत से सीधे जुड़ा है.
इस लिहाज से दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन को सिर्फ एक परिवहन परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा सकता. यह बीएसपी की उत्पादन क्षमता, विस्तार योजनाओं और भविष्य की लौह अयस्क आपूर्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है.
बस्तर के लिए भी खुलेंगे विकास के रास्ते
रावघाट तक रेल पहुंचने का फायदा सिर्फ बीएसपी तक सीमित नहीं रहेगा. रेल लाइन के आसपास सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार जैसी सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी. बस्तर के दूरदराज इलाकों के लोगों के लिए दुर्ग-भिलाई और प्रदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंच आसान हो सकती है.
यह भी पढ़ें- वाराणसी: अक्टूबर में PM करेंगे गंजारी स्टेडियम का उद्घाटन! नवंबर में हो सकता है पहला रणजी मुकाबला, जानें क्या है खास
बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार, कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नए अवसर मिलने की उम्मीद है. यानी 95 किलोमीटर की यह रेल लाइन एक तरफ भिलाई की औद्योगिक जरूरत पूरी करेगी, तो दूसरी तरफ बस्तर के विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बन सकती है.


