पटना: बिहार में छह ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप के विकास की तैयारी तेज हो गई है. इन टाउनशिप के लिए टाउन प्लानिंग स्कीम यानी मास्टर प्लान तैयार करने से पहले बड़े स्तर पर सर्वे कराया जाएगा. सर्वे के दौरान जमीन का इस्तेमाल, राजस्व रिकॉर्ड, मौजूदा मालिकाना हक और इलाके की भौगोलिक स्थिति समेत कई पहलुओं की जानकारी जुटाई जाएगी.
नगर विकास विभाग इसके लिए सलाहकार एजेंसी का चयन करेगा. एजेंसी छहों टाउनशिप का नक्शा तैयार करने के साथ भूमि उपयोग की योजना और टाउन प्लानिंग की विस्तृत रूपरेखा तैयार करेगी.
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इन 6 शहरों में बनेगी ग्रीनफील्ड टाउनशिप
राज्य में कुल 12 सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है. इन्हें चार समूहों में बांटा गया है. अब ग्रुप-3 और ग्रुप-4 की टाउनशिप के लिए टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी.
ग्रुप-3 में
दरभंगा-मिथिला
सहरसा-कोसी
मुजफ्फरपुर-तिरहुत
ग्रुप-4 में
पूर्णिया-पूर्णिया
मुंगेर- अंग
सोनपुर- हरिहरनाथपुरम
जमीन मालिकों की भी बनेगी सूची
टाउनशिप के लिए जमीन लेने में लैंड पूलिंग को प्राथमिकता दी जानी है. ऐसे में सर्वे के दौरान संबंधित जमीन मालिकों की सूची तैयार की जाएगी. उनके राजस्व रिकॉर्ड, खाता-खसरा नंबर और जमीन के क्षेत्रफल का विवरण जुटाया जाएगा. इसके बाद जमीन की जमाबंदी और सर्वे डेटा का मिलान किया जाएगा. इससे वर्तमान मालिकाना हक और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिलेगी. लैंड पूलिंग के तहत जमीन लेने के बाद संबंधित भू-स्वामियों को बदले में किस तरह और कहां जमीन उपलब्ध कराई जाएगी, इसकी योजना तैयार करने में भी ये रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे.
ड्रोन और आधुनिक तकनीक से होगा सर्वे
टाउन प्लानिंग स्कीम तैयार करने से पहले इलाके का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा. इसमें कैडेस्ट्रल मैप और बेस मैप तैयार किए जाएंगे. पूरे क्षेत्र का टोपोग्राफिक सर्वे भी होगा. सर्वे के लिए टोटल स्टेशन और ड्रोन आधारित सर्वे जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें जमीन की सटीक माप, खाता-खसरा नंबर, वर्तमान मालिकाना हक और प्रत्येक संपत्ति की चौहद्दी का विवरण दर्ज किया जाएगा.
सड़क से लेकर तालाब और नालों तक की होगी मैपिंग
सर्वे के दौरान सिर्फ जमीन और मकानों का ही रिकॉर्ड नहीं तैयार होगा. इलाके में मौजूद मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक संसाधनों को भी नक्शे में दर्ज किया जाएगा. इसमें नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे, जिला और संपर्क सड़कें, निजी सड़कें, पैदल चलने के रास्ते, डिवाइडर और ट्रैफिक पोस्ट, बस स्टॉप, झील और तालाब, पानी की टंकियां और कुएं, नहर और जल निकासी व्यवस्था जैसी सुविधाओं की मैपिंग की जाएगी.
तय होगा किस जमीन का क्या इस्तेमाल होगा
टाउन प्लानिंग स्कीम के दौरान यह भी तय किया जाएगा कि किस जमीन का इस्तेमाल आवासीय, व्यावसायिक, सार्वजनिक सुविधा या अन्य जरूरतों के लिए किया जाएगा. टाउनशिप में सड़क, सार्वजनिक उपयोगिता और दूसरी आवश्यक सुविधाओं के लिए जमीन का भी रेखांकन किया जाएगा. भविष्य की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखते हुए सड़क, पानी, सीवरेज, ड्रेनेज और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास की जरूरत का आकलन किया जाएगा.
भू-स्वामियों से चर्चा में भी मदद करेगी एजेंसी
सलाहकार एजेंसी भू-स्वामियों के साथ होने वाली बैठकों और चर्चाओं में तकनीकी सहायता देगी. इसके अलावा राज्य सरकार और संबंधित विभागों से जरूरी मंजूरी और कानूनी स्वीकृति लेने में नगर विकास प्राधिकरण की मदद भी करेगी.
नियमों के तहत तैयार होगी योजना
इन छह टाउनशिप की योजना तैयार करते समय बिहार टाउन प्लानिंग स्कीम नियमावली 2025 और बिहार अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2012 के प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा. सलाहकार एजेंसी को इसी कानूनी ढांचे के तहत काम करना होगा. इसके साथ ही टाउनशिप परियोजनाओं के संभावित सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का मूल्यांकन भी किया जाएगा.
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नगर विकास विभाग ने एजेंसी के चयन के लिए इससे पहले मई 2026 में निविदा जारी की थी. विभागीय सूत्रों के अनुसार तकनीकी कारणों से अब दोबारा निविदा निकाली गई है. एजेंसी के चयन के बाद छहों टाउनशिप के विस्तृत सर्वे और मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.


