ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों के लिए दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया अब अधिक डिजिटल और सुरक्षित बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले National e-Governance Division (NeGD) ने Association of Australian Education Representatives in India (AAERI) के साथ साझेदारी कर AAERI Verify नाम का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है.
यह प्लेटफॉर्म DigiLocker के साथ एकीकृत है और भारतीय छात्रों को ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में आवेदन के दौरान अपने शैक्षणिक, पहचान और वित्तीय दस्तावेज डिजिटल तरीके से सत्यापित कराने की सुविधा देगा.
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नई दिल्ली में हुआ प्लेटफॉर्म का शुभारंभ
AAERI Verify को नई दिल्ली में आयोजित AAERI Annual Convention के दौरान लॉन्च किया गया.
इस पहल का उद्देश्य ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए भारतीय छात्रों द्वारा जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच को आसान बनाना है. नई व्यवस्था के तहत पारंपरिक कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी और सत्यापन की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकेगी.
DigiLocker से जुड़ेगा दस्तावेज सत्यापन
AAERI Verify को DigiLocker के साथ एकीकृत किया गया है. इसके माध्यम से विश्वविद्यालयों को छात्रों के स्रोत से सत्यापित डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंच मिल सकेगी.
यह प्रक्रिया संबंधित अधिकृत दस्तावेज जारी करने वाली संस्थाओं से प्राप्त रिकॉर्ड पर आधारित होगी. प्लेटफॉर्म में छात्रों की सहमति आधारित व्यवस्था रखी गई है, जिससे दस्तावेज साझा करने की प्रक्रिया अधिक नियंत्रित तरीके से पूरी की जा सकेगी.
दो चरणों में होगी दस्तावेजों की जांच
AAERI Verify के तहत दस्तावेज सत्यापन को दो चरणों में पूरा किया जाएगा.
पहले चरण को Student Check नाम दिया गया है. यह विश्वविद्यालय में आवेदन करने से पहले किया जाएगा. इसके तहत छात्र के शैक्षणिक और पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा.
दूसरा चरण Sponsor Check होगा. यह छात्र को दाखिला मिलने के बाद किया जाएगा और इसमें वित्तीय दस्तावेजों का सत्यापन शामिल होगा.
कागजी प्रक्रिया की जगह consent-based सिस्टम
नई डिजिटल व्यवस्था मैनुअल कागजी प्रक्रिया की जगह सहमति आधारित सिस्टम उपलब्ध कराएगी.
इसके तहत छात्र की अनुमति के आधार पर संबंधित विश्वविद्यालय अधिकृत दस्तावेज जारी करने वाली संस्थाओं से स्रोत-प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड प्राप्त कर सकेगा.
इससे छात्रों और विश्वविद्यालयों दोनों के लिए दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रक्रिया में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल
NeGD के निदेशक जे. एल. गुप्ता ने कहा कि यह पहल दिखाती है कि भारत का Digital Public Infrastructure वैश्विक स्तर की चुनौतियों से निपटने में किस तरह उपयोगी हो सकता है.
उन्होंने कहा कि AAERI Verify अंतरराष्ट्रीय दाखिला प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पेपरलेस और प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम है.
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भारतीय छात्रों के लिए क्या बदलेगा
AAERI Verify के जरिए ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों के दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा.
शैक्षणिक रिकॉर्ड, पहचान से जुड़े दस्तावेज और दाखिले के बाद वित्तीय दस्तावेजों की जांच के लिए अलग-अलग चरण निर्धारित किए गए हैं. DigiLocker के साथ एकीकरण से डिजिटल रिकॉर्ड के इस्तेमाल की सुविधा भी इस व्यवस्था का हिस्सा होगी.
यह पहल खास तौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटीज में आवेदन करते हैं और जिन्हें दाखिले की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध कराने होते हैं.


