Mumbai-Ahmedabad High-Speed Rail: भारत में मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. करीब 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर जापानी शिंकानसेन तकनीक आधारित हाईस्पीड ट्रेनें दौड़ेंगी. आम ट्रेनों से अलग बुलेट ट्रेन में आगे या पीछे कोई बड़ा लोकोमोटिव इंजन नहीं होता. आखिर यह ट्रेन बिना इंजन के कैसे दौड़ती है और इसे तैयार करने में कितनी लागत आती है? आइए समझते हैं.
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बुलेट ट्रेन में इंजन क्यों नहीं होता?
दरअसल, बुलेट ट्रेन में अलग से लोकोमोटिव इंजन लगाने के बजाय Electric Multiple Unit (EMU) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें ट्रेन के कई डिब्बों के पहियों के पास इलेक्ट्रिक मोटर लगी होती हैं. यानी पूरी ट्रेन के अलग-अलग हिस्से मिलकर उसे आगे बढ़ाते हैं. सामान्य ट्रेन में एक भारी इंजन पूरे रैक को खींचता है, जबकि हाईस्पीड ट्रेन में मोटरों का वजन अलग-अलग कोच में बंटा रहता है. इससे ट्रेन को तेजी से गति पकड़ने और नियंत्रित करने में मदद मिलती है.
ट्रेन को बिजली कहां से मिलती है?
बुलेट ट्रेन की छत पर लगे पेंटोग्राफ ऊपर लगे हाई-वोल्टेज ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों से बिजली लेते हैं. इसके बाद ट्रांसफॉर्मर और इनवर्टर के जरिए बिजली को ट्रेन के अलग-अलग हिस्सों में लगी मोटरों तक पहुंचाया जाता है. इसी तकनीक की वजह से ट्रेन कम समय में बेहद तेज रफ्तार पकड़ सकती है. ब्रेकिंग के दौरान मोटर से पैदा होने वाली ऊर्जा को दोबारा विद्युत प्रणाली में भेजने की तकनीक भी इस्तेमाल की जा सकती है.
एक बुलेट ट्रेन की कीमत कितनी होती है?
बुलेट ट्रेन की कीमत सिर्फ उसके डिब्बों से तय नहीं होती. ट्रेन सेट के अलावा हाईस्पीड ट्रैक, स्टेशन, सिग्नलिंग, बिजली की व्यवस्था, पुल, एलिवेटेड कॉरिडोर और सुरंगों पर भी भारी खर्च होता है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 10 से 16 कोच वाली जापानी शिंकानसेन ट्रेन के एक रैक की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है. हालांकि अलग-अलग ट्रेन मॉडल, कॉन्फिगरेशन और तकनीकी उपकरणों के कारण वास्तविक लागत में काफी अंतर हो सकता है.
508 KM का मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर
भारत का पहला हाईस्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगा. इसकी लंबाई करीब 508 किलोमीटर है. परियोजना में बड़े हिस्से में एलिवेटेड ट्रैक के साथ कई महत्वपूर्ण पुल और सुरंगें बनाई जा रही हैं. इस परियोजना की कुल लागत ट्रेन सेट की कीमत से कई गुना ज्यादा है, क्योंकि इसमें पूरा हाईस्पीड रेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है.
320 KM प्रति घंटे तक की रफ्तार
हाईस्पीड ट्रेन को करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने के लिए इसका डिजाइन सामान्य ट्रेनों से बिल्कुल अलग होता है. ट्रेन की बॉडी को एयरोडायनामिक बनाया जाता है ताकि तेज गति पर हवा का दबाव कम हो. इसके अलावा हाईस्पीड रेल में आधुनिक सिग्नलिंग, ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल और सुरक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है.
बत्तख की चोंच जैसी क्यों होती है ट्रेन?
बुलेट ट्रेन के आगे वाले हिस्से का डिजाइन लंबा और नुकीला होता है. यह डिजाइन सिर्फ देखने में आकर्षक नहीं है, बल्कि हवा के दबाव और शोर को कम करने के लिए तैयार किया जाता है. ट्रेन के अगले हिस्से में बड़ा इंजन नहीं होता. ड्राइवर केबिन के नीचे और अन्य कोचों में लगी इलेक्ट्रिक मोटर ट्रेन को गति देती हैं.
सिर्फ ट्रेन नहीं, पूरा सिस्टम है महंगा
हाईस्पीड ट्रैक
एलिवेटेड वायाडक्ट
सुरंगें
रेलवे स्टेशन
हाई-वोल्टेज बिजली प्रणाली
सिग्नलिंग और कम्युनिकेशन
सुरक्षा एवं ट्रेन कंट्रोल सिस्टम
पुल और अन्य सिविल निर्माण
यही वजह है कि एक बुलेट ट्रेन सेट की कीमत की तुलना पूरी मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना की लागत से नहीं की जा सकती.
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आसान भाषा में समझें
सामान्य ट्रेन: एक बड़ा इंजन पूरे डिब्बों को खींचता है.
बुलेट ट्रेन: कई कोचों में इलेक्ट्रिक मोटर पूरी ट्रेन मिलकर चलती है.
यानी बुलेट ट्रेन वास्तव में “बिना इंजन” नहीं, बल्कि अलग लोकोमोटिव इंजन के बिना चलने वाली इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट ट्रेन है. यही तकनीक इसे तेज गति, बेहतर वजन वितरण और हाईस्पीड संचालन के लिए उपयुक्त बनाती है.


