पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ कक्ष में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे. इस दौरान सीमा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, सीमावर्ती इलाकों में कानून-व्यवस्था और अवैध गतिविधियों की रोकथाम को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी गई.
यह भी पढ़ें- दिल्ली में 3 लिंक एक्सप्रेसवे का प्लान, नजफगढ़-मुंडका से नोएडा-गाजियाबाद तक बदलेगी कनेक्टिविटी
भारत की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि भारत की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है. भारत-नेपाल सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमा सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने निर्देश दिया कि सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एसएसबी, बिहार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां आपसी समन्वय से काम करें. उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज, नकली भारतीय मुद्रा, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए.
सीमावर्ती बैंकों में नकली नोट की जांच की व्यवस्था
सीएम ने कहा कि सीमा क्षेत्र के बैंकों में नकली नोटों की पहचान करने वाली आवश्यक मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. इसके साथ ही संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और फर्जी या संदिग्ध बैंक खातों की पहचान कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए.
ड्रग्स तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त भारत 2029’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमा क्षेत्र से मादक पदार्थों की आवाजाही रोकने के लिए ड्रग्स तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए. संवेदनशील इलाकों में खुफिया नेटवर्क को और मजबूत करने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर नियमों के तहत त्वरित कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया.
हर महीने होगी समन्वय बैठक
सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की केंद्रीय सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी बैठकें हर महीने होनी चाहिए, ताकि सीमा से जुड़े मामलों में सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके.
अवैध गतिविधियों पर निगरानी के साथ शिक्षा पर भी जोर
बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना पंजीकरण चल रहे धार्मिक स्थलों की पहचान करने और मौजूदा कानून एवं नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया. साथ ही सीमा क्षेत्रों में बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को सतर्कता, सूचना साझा करने और आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा. संवेदनशील क्षेत्रों में खुफिया तंत्र मजबूत कर संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ समयबद्ध और नियमसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.
यह भी पढ़ें- ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत! दिल्ली को मिलेंगी 4 बड़ी सौगात, कालकाजी और ग्रेटर कैलाश में आसान होगा सफर
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, डीजीपी स्पेशल ब्रांच कुंदन कृष्णन समेत विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव मौजूद रहे. मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए. वहीं, सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े.


