New Delhi, August 20: भारत को ग्लोबल एयर कार्गो ट्रांसशिपमेंट हब बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडु ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 में स्थित दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड यानी DIAL के ट्रांसशिपमेंट एक्सीलेंस सेंटर से ट्रांसशिपमेंट कार्गो सुधार के विस्तारित चरण की शुरुआत की.
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रांसशिपमेंट कार्गो की अनिवार्य दोबारा स्क्रीनिंग की जरूरत कम होगी. इससे कार्गो के ट्रांजिट टाइम, हैंडलिंग कॉस्ट और एयरपोर्ट टर्मिनलों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी.
60 घंटे से घटकर करीब 20 घंटे हुआ ट्रांजिट टाइम
राम मोहन नायडु ने कहा कि सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. एयर कार्गो इंडस्ट्री से मिले फीडबैक में ट्रांसशिपमेंट कार्गो की अनिवार्य दोबारा स्क्रीनिंग को एक बड़ी परेशानी बताया गया था.
इसके बाद चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट रूट पर एक प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट यानी PoC शुरू किया गया. इसके नतीजों से पता चला कि औसत एंड-टू-एंड ट्रांजिट टाइम को करीब 60 घंटे से घटाकर 20 घंटे किया जा सकता है.
यानी कार्गो को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में लगने वाला समय काफी कम हुआ है.
20 जून से शुरू हुआ था PoC
डोमेस्टिक-टू-इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट के लिए यह PoC 20 जून 2026 को चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट सेक्टर पर शुरू किया गया था.
इसका संचालन एयर इंडिया ने किया. PoC शुरू होने के बाद अब तक इसके तहत 280 मीट्रिक टन कार्गो लादा गया है. वहीं, विमान की कार्गो क्षमता का इस्तेमाल भी 75 फीसदी से बढ़कर करीब 100 फीसदी तक पहुंच गया.
इससे यह मॉडल कार्गो ऑपरेशन को ज्यादा efficient बनाने में मददगार साबित हुआ.
अब चार और शहर और दो नए इंटरनेशनल डेस्टिनेशन जुड़े
PoC की सफलता के बाद इस सुविधा का दायरा बढ़ाया गया है. अब चार और घरेलू प्रस्थान स्टेशनों को नेटवर्क से जोड़ा गया है.
इनमें बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद शामिल हैं. इसके अलावा लंदन और कोपनहेगन को नए अंतरराष्ट्रीय गंतव्य के तौर पर जोड़ा गया है.
इस विस्तार के बाद इन रूट्स पर एयर इंडिया की मासिक कार्गो क्षमता 1,763 मीट्रिक टन से बढ़कर 3,183 मीट्रिक टन होने का अनुमान है. यह करीब 80 फीसदी की बढ़ोतरी है.
भारत को ग्लोबल कार्गो ट्रांसशिपमेंट हब बनाने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की तत्काल प्राथमिकता डोमेस्टिक-टू-इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट को मजबूत करना है. इसके साथ ही आगे भारत को ग्लोबल कार्गो ट्रांसशिपमेंट हब बनाने की दिशा में काम किया जाएगा.
भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सरकार देश को पूर्व और पश्चिम के बीच एक अहम कार्गो ट्रांजिट पॉइंट के रूप में विकसित करना चाहती है.
आने वाले समय में इस फ्रेमवर्क को इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल और इंटरनेशनल-टू-डोमेस्टिक ट्रांसशिपमेंट तक भी बढ़ाने की योजना है.
एयर कार्गो हब को मजबूत करने पर फोकस
राम मोहन नायडु ने कहा कि यह कदम देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स को ग्लोबल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है.
अब तक एयरपोर्ट्स पर पैसेंजर हब और हब-एंड-स्पोक मॉडल को मजबूत करने पर काफी फोकस रहा है. इसी तरह अब एयर कार्गो के लिए भी हब की क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है.
इससे भारत के एयर कार्गो सेक्टर को ग्लोबल मार्केट में ज्यादा competitive बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
2025 में बदला गया था सुरक्षा फ्रेमवर्क
इस ट्रांसशिपमेंट मॉडल के लिए संशोधित सुरक्षा फ्रेमवर्क को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी यानी BCAS ने 21 जुलाई 2025 को अधिसूचित किया था.
यह AVSEC Circular No. 6/2024 के Addendum-II के तहत जारी किया गया था. इसके तहत तय सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित ट्रांसशिपमेंट कार्गो को दोबारा स्क्रीनिंग के बिना ट्रांसफर करने की अनुमति दी गई थी.
इसके लिए dedicated Transfer Cargo Security Hold Area यानी TCSHA का इस्तेमाल किया जाता है.
DIAL, BCAS और CISF समेत सभी stakeholders की भूमिका
मंत्री ने इस मॉडल को सफल बनाने में योगदान देने वाले DIAL, BCAS, CISF, एयरलाइंस, कस्टम्स और दूसरे stakeholders की तारीफ की.
उन्होंने कहा कि सभी के साथ मिलकर काम करने से ट्रांसशिपमेंट कार्गो की एक बड़ी operational बाधा को दूर करने में मदद मिली है. इससे भारत के एयर कार्गो ecosystem की competitiveness बेहतर हो सकती है.
आगे और स्टेशन जोड़े जाएंगे
सरकार आने वाले महीनों में इस फ्रेमवर्क के तहत और घरेलू departure stations और international destinations जोड़ने की तैयारी कर रही है.
इससे भारत में कार्गो ट्रांसशिपमेंट का नेटवर्क और बड़ा होगा और देश को ग्लोबल एयर कार्गो हब के रूप में विकसित करने की कोशिश को और गति मिलेगी.
कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, AAI अध्यक्ष विपिन कुमार, मंत्रालय के संयुक्त सचिव आसंगबा चुबा ओ, BCAS की संयुक्त महानिदेशक प्रतिभा अम्बेडकर समेत MoCA, AAI, BCAS, DIAL, एयर इंडिया और अन्य stakeholders के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.


