Raichur, August 18: कर्नाटक के रायचुर में कभी कचरे के बड़े ढेर के रूप में मौजूद यकलासपुरा डंपसाइट अब हरियाली की ओर बढ़ रहा है. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत वैज्ञानिक तरीके से पुराने कचरे का निस्तारण कर अब तक करीब 22 एकड़ शहरी जमीन को वापस हासिल किया गया है. इस जगह पर अब पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए मियावाकी जंगल विकसित किया जा रहा है.
यकलासपुरा डंपसाइट करीब 35 एकड़ में फैला हुआ था. यहां कई वर्षों से नगर निकाय का ठोस कचरा जमा हो रहा था. कचरे के इस बड़े ढेर के कारण आसपास रहने वाले लोगों के लिए पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियां पैदा हो रही थीं. कचरे से निकलने वाला लीचेट, बदबू और प्रदूषण आसपास के क्षेत्र के लिए चिंता का कारण था. इसके अलावा बड़ी मात्रा में जमीन भी लंबे समय से कचरे के इस्तेमाल में थी.
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62,252 मीट्रिक टन पुराने कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण
रायचुर सिटी कॉरपोरेशन ने यकलासपुरा डंपसाइट की स्थिति को देखते हुए पुराने कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की परियोजना शुरू की. इसके तहत अब तक 62,252 मीट्रिक टन पुराने कचरे को प्रोसेस और रिमेडिएट किया जा चुका है.
इस प्रक्रिया के बाद करीब 22 एकड़ मूल्यवान शहरी जमीन को वापस हासिल किया गया है. डंपसाइट के कचरे को हटाने से पर्यावरण से जुड़े जोखिमों को कम करने के साथ आसपास के क्षेत्र के लैंडस्केप में भी सुधार हुआ है.
यह परियोजना रायचुर में शहरी स्वच्छता और पर्यावरण प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है.
22 एकड़ जमीन पर अब हरियाली की तैयारी
कचरे के निस्तारण के बाद वापस मिली जमीन का इस्तेमाल सिर्फ खाली जगह के रूप में नहीं किया जा रहा है. रायचुर सिटी कॉरपोरेशन ने इसे पर्यावरण के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में कदम उठाया है.
5 जून 2026 से इस जमीन पर पौधरोपण की गतिविधियां शुरू की गईं. करीब 5 से 7 एकड़ में मियावाकी जंगल विकसित करने की योजना है. इसके लिए रायचुर सिटी कॉरपोरेशन ने सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और न्यू इंडिया स्पेस लिमिटेड के साथ मिलकर काम किया है.
लगाए गए 60 हजार पौधे
मियावाकी जंगल के लिए कुल 60,000 पौधे लगाए गए हैं. इनमें बांस और अन्य स्थानीय प्रजातियों के पौधे शामिल हैं. उम्मीद है कि एक साल के भीतर इस क्षेत्र में जंगल के रूप में हरियाली विकसित हो जाएगी.
इन पौधों से मिट्टी को बेहतर बनाने, कार्बन को सोखने, जैव विविधता बढ़ाने और हवा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
यकलासपुरा की जमीन पर यह बदलाव कचरे से प्रभावित क्षेत्र को एक उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल स्थान में बदलने की दिशा में किया गया प्रयास है.
विश्व पर्यावरण दिवस पर हुआ उद्घाटन
यकलासपुरा में बदली गई साइट का उद्घाटन 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया.
इस पहल को पर्यावरणीय स्थिरता को आगे बढ़ाने वाले प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. पुराने डंपसाइट को साफ कर जमीन को दोबारा उपयोग में लाने और वहां हरियाली विकसित करने से रायचुर ने शहरी कचरा प्रबंधन के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ने की कोशिश की है.
दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल
यकलासपुरा का बदलाव केवल पुराने कचरे को हटाने तक सीमित नहीं है. लंबे समय से पर्यावरणीय चुनौती बने डंपसाइट को दोबारा उपयोगी जमीन में बदलने और उसके एक हिस्से पर जंगल विकसित करने की पहल की गई है.
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत देश के अलग-अलग शहरों में पुराने डंपसाइट को साफ कर उन्हें उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल स्थानों में बदलने पर काम किया जा रहा है. रायचुर की यह पहल भी ऐसे शहरों के लिए एक मॉडल के रूप में सामने आई है, जो पुराने कचरे के ढेर और उससे जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की दिशा में काम कर रहे हैं.


