Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम हरिभाऊ मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में हैं. खाद्य और दवा सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र में चल रही कार्रवाई के दौरान बॉलीवुड सितारों शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इसके बाद मुंढे का नाम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी खाद्य और दवा सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे अभियान का समर्थन किया है.
तुकाराम मुंढे को एक ऐसे अधिकारी के तौर पर जाना जाता है, जो नियमों के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर समझौता करने के लिए तैयार नहीं रहते. उनके करीब दो दशक लंबे करियर में लगातार तबादले, बड़े फैसले और कई विवाद चर्चा में रहे हैं.
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कौन हैं तुकाराम मुंढे?
तुकाराम हरिभाऊ मुंढे महाराष्ट्र कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. मई 2026 में उन्हें महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन का आयुक्त नियुक्त किया गया. इस पद पर उनकी जिम्मेदारी राज्य में खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है.
किसान परिवार में बीता बचपन
मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले में एक किसान परिवार में हुआ था. उनका बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता. परिवार खेती पर निर्भर था और वह खुद भी खेतों में काम करते थे. कई बार उन्हें रात में उठकर खेतों में पानी देना पड़ता था. बताया जाता है कि उनका परिवार मिट्टी के घर में रहता था और खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर थी. वे स्थानीय जिला परिषद स्कूल में पढ़ने जाते थे. बचपन में देखी गई ग्रामीण समस्याओं ने उनके भीतर व्यवस्था को बेहतर बनाने की सोच पैदा की.
पढ़ाई से UPSC तक का सफर
मुंढे ने 1996 में सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, औरंगाबाद से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया. इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और 2005 में परीक्षा पास की. उन्हें देशभर में 20वीं रैंक मिली और महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ.
रेत माफिया के खिलाफ भी दिखाई सख्ती
प्रशासनिक करियर के शुरुआती दौर में मुंढे ने अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई की. इस दौरान उन्हें कथित तौर पर धमकियों का भी सामना करना पड़ा. सोलापुर में रेत माफिया द्वारा उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की खबरें सामने आईं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कार्रवाई जारी रखी.
158 संविदा चालकों पर कार्रवाई
2017-18 में पुणे महानगर परिवहन महामंडल में रहते हुए मुंढे ने लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित 158 संविदा चालकों को बर्खास्त कर दिया था. उनके इस फैसले का कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया और राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई. यह मामला उनकी सख्त कार्यशैली के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है.
स्वास्थ्य विभाग में भी सख्ती
2022 में स्वास्थ्य आयुक्त के तौर पर उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर जोर दिया. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रात के समय निरीक्षण और कर्मचारियों की उपस्थिति को बायोमेट्रिक व्यवस्था से जोड़ने जैसी पहल की गई. सरकारी ड्यूटी के दौरान निजी क्लीनिक चलाने के आरोपों को लेकर डॉक्टरों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई. इसके बाद 2023 में उनका तबादला कर दिया गया.
नवी मुंबई में लिए कई बड़े फैसले
2016 में नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त रहते हुए मुंढे ने कई बड़े फैसले लिए. उनके कार्यकाल में करीब 20 करोड़ रुपये की संगमरमर की प्रतिमा और 163 करोड़ रुपये की मोरबे बांध सौर परियोजना से जुड़े फैसलों को रद्द किया गया. उनका तर्क था कि ऐसे खर्चों के बजाय धन का इस्तेमाल नागरिक सुविधाओं और दिव्यांगों के लिए शहर को अधिक सुविधाजनक बनाने में किया जाना चाहिए.
‘आयुक्त के साथ सैर’ से जुड़े नागरिक
नवी मुंबई में मुंढे ने ‘आयुक्त के साथ सैर’ नाम की पहल शुरू की. इसके तहत वह हर रविवार सुबह नागरिकों के साथ सैर करते थे. इस दौरान लोग सीधे उनसे अपनी शिकायतें और समस्याएं साझा कर सकते थे. इस पहल को नागरिकों का समर्थन मिला, हालांकि उनके कई फैसलों को लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ मतभेद भी सामने आए. 2017 में उनका तबादला कर दिया गया.
21 साल में 25 तबादले
तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बात उनके लगातार तबादले रहे हैं. उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, करीब 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है. कई मौकों पर उन्हें सामान्य कार्यकाल पूरा करने से पहले ही दूसरी जिम्मेदारी दी गई और कुछ समय उन्हें बिना पद के भी रखा गया. इसके बावजूद उनकी कार्यशैली में बदलाव नहीं आया और वह नियमों के सख्त पालन पर जोर देते रहे.
कई पुरस्कारों से भी सम्मानित
मुंढे को प्रशासनिक सेवाओं के दौरान कई पुरस्कार मिले हैं. 2015-16 में उन्हें महाराष्ट्र सरकार का सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी पुरस्कार मिला. उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया. जल संरक्षण के काम के लिए उन्हें ‘महाराष्ट्र के जलपुरुष’ के नाम से भी जाना गया. नवी मुंबई में उनके कार्यकाल के दौरान ई-शौचालय और भूकंपरोधी सुधार जैसी पहलों को SKOCH Order of Merit मिला. 2017 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.
अब FDA में क्यों मचा है हड़कंप?
महाराष्ट्र FDA ने 13 अगस्त को ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म के जरिए खाद्य पदार्थ बेचने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया. राज्यभर में 86 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया. इस दौरान एक प्रतिष्ठान को तत्काल कारोबार बंद करने का निर्देश दिया गया, जबकि 60 सुधार नोटिस जारी किए गए. 14 खाद्य कारोबार लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए. दूध और डेयरी उत्पादों की जांच के दौरान 698 किलो सामान जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 34,302 रुपये बताई गई.
गुटखा-पान मसाला पर भी शिकंजा
प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला की बिक्री, वितरण और परिवहन से जुड़े मामलों में FDA ने 10 FIR दर्ज कीं. इन मामलों में नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई और करीब 46.76 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया. इसके अलावा दूध एवं डेयरी उत्पाद, बेकरी सामान और खाद्य तेल समेत करीब 1,270 किलो अन्य खाद्य सामग्री भी जब्त की गई.
आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं पर कार्रवाई
FDA ने राज्य में लाइसेंस प्राप्त 434 आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं का निरीक्षण किया. जांच के बाद 135 निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जबकि 10 निर्माताओं के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए गए. यह कार्रवाई दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े कथित गंभीर उल्लंघनों को लेकर की गई.
शाहरुख, अजय और टाइगर को क्यों मिला नोटिस?
FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन में ब्रांड प्रमोटर के तौर पर शामिल होने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. यह मामला तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों के प्रचार तथा कथित परोक्ष विज्ञापन से जुड़े नियमों के संदर्भ में है. बॉलीवुड के बड़े सितारों के नाम सामने आने के बाद यह कार्रवाई खास तौर पर चर्चा में आ गई है.
पार्ले एग्रो के खिलाफ भी कार्रवाई
FDA को चेंबूर स्थित पार्ले एग्रो के गोदाम में फ्रूटी और ऐपि फिज का एक्सपायर्ड स्टॉक मिला. इसके बाद संबंधित लाइसेंस निलंबित किया गया. ऑनलाइन खाद्य डिलीवरी से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की गई, जिनमें Blinkit, Zepto और Instamart से जुड़े खाद्य कारोबार शामिल हैं. इन मामलों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया.
हाईकोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा विवाद
FDA की कार्रवाई को जहां खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी बताया जा रहा है, वहीं कुछ मामलों में कार्रवाई के तरीके पर सवाल भी उठे हैं. बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले में FDA की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए इसे ‘मच्छर मारने के लिए तलवार’ जैसा बताया. अदालत ने कहा कि विभाग के पास सख्त कार्रवाई करने की शक्ति है, लेकिन हर मामले में उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि कई बार FDA पहले कार्रवाई करता दिखाई देता है और बाद में जांच करता है. कोर्ट ने ऐसी कठोर कार्रवाई जारी रहने पर विभाग पर जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी.
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मुंढे का क्या है लक्ष्य?
मुंढे का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ छापेमारी और दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है. वह खाद्य और दवा सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी के तौर पर देखते हैं. उनके मुताबिक, नागरिकों को गड़बड़ी की जानकारी देनी होगी, कारोबारियों को नियमों का पालन करना होगा और दवा लाइसेंस धारकों को निर्धारित मानकों के अनुसार काम करना होगा. उनका लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जहां 100 प्रतिशत स्वैच्छिक नियम पालन हो और नियामक को बार-बार कार्रवाई की जरूरत न पड़े. यही वजह है कि 21 साल में 25 तबादलों के बावजूद तुकाराम मुंढे की पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में बनी हुई है, जो अपने सख्त फैसलों और बेबाक प्रशासनिक अंदाज के लिए लगातार चर्चा में रहते हैं.


