Gorakhpur, August 23: गोरखपुर एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने टीबी की जांच को लेकर अहम शोध किया है. नई जांच तकनीक की मदद से दवा-संवेदनशील और दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान करीब 2 घंटे में की जा सकती है. इससे उन मरीजों की पहचान जल्दी करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें सामान्य टीबी की दवाओं से फायदा नहीं हो रहा है.
पहले इस तरह की जांच में करीब 5 से 6 सप्ताह तक का समय लग सकता था. ऐसे में नई तकनीक से टीबी के मरीजों में दवा प्रतिरोध की जल्दी पहचान और इलाज शुरू करने की संभावना बढ़ सकती है.
2 घंटे में मिल सकती है जांच की जानकारी
गोरखपुर एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हुए शोध में ऐसी जांच तकनीक का अध्ययन किया गया, जिससे टीबी के जीवाणु में दवा प्रतिरोध की सीधे पहचान की जा सकती है.
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि डॉक्टरों को मरीज के टीबी संक्रमण के साथ-साथ यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि बीमारी में दवा के प्रति resistance मौजूद है या नहीं.
पहले दवा प्रतिरोध की पुष्टि के लिए लंबा समय लग सकता था. नई तकनीक इस प्रक्रिया को काफी तेज कर सकती है.
100 टीबी संक्रमित नमूनों पर हुआ अध्ययन
यह अध्ययन डॉ. अरूप मोहंती के नेतृत्व में किया गया. शोध के दौरान टीबी से संक्रमित 100 नमूनों की जांच की गई.
इनमें से 89 नमूने नई तकनीक से पॉजिटिव पाए गए. शोधकर्ताओं ने इस तकनीक के जरिए टीबी के जीवाणु में दवा प्रतिरोध की पहचान करने की क्षमता का अध्ययन किया.
शोध के नतीजे नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुए हैं.
दूसरी लाइन की कुछ दवाओं का resistance भी पता चलेगा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस जांच तकनीक की मदद से टीबी के जीवाणु में दवा प्रतिरोध का पता लगाया जा सकता है. इसके अलावा दूसरी पंक्ति की कुछ दवाओं के प्रति resistance की पहचान भी संभव है.
दवा-प्रतिरोधी टीबी के मामलों में यह जानकारी काफी अहम होती है, क्योंकि ऐसे मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों को दवाओं का चुनाव सावधानी से करना पड़ता है.
मरीजों को सही इलाज जल्दी मिलने की उम्मीद
दवा-प्रतिरोधी टीबी की पहचान जितनी जल्दी होगी, मरीज के लिए सही treatment शुरू करने में उतनी ही मदद मिल सकती है.
नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने पर ऐसे मरीजों की पहचान में लगने वाला समय कम हो सकता है. इससे डॉक्टरों को समय रहते इलाज की रणनीति तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी मरीज के इलाज का फैसला जांच रिपोर्ट और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही किया जाता है.
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यूपी में चुनिंदा केंद्रों पर उपलब्ध है तकनीक
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक उत्तर प्रदेश में चुनिंदा केंद्रों पर उपलब्ध है. गोरखपुर एम्स के इस शोध को टीबी की जांच को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
टीबी के मामलों में दवा प्रतिरोध की जल्दी पहचान इलाज को बेहतर तरीके से manage करने में मदद कर सकती है. खासकर ऐसे मरीजों में जहां सामान्य treatment का response उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलता.
Source – डॉ. अरूप मोहंती, एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, एम्स गोरखपुर


