देहरादून, 27 अगस्त 2026: नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद उत्तराखंड में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. सीमावर्ती चंपावत जिले के टनकपुर में शारदा बैराज और नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों पर निगरानी तेज कर दी गई है. उत्तराखंड SDRF की टनकपुर टीम को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी के जलस्तर तथा संभावित खतरे पर लगातार नजर रखी जा रही है.
नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ का असर नीचे की ओर नदी तंत्र में भी देखा गया है. ऐसे में उत्तराखंड प्रशासन ने शारदा नदी से जुड़े इलाकों में एहतियाती तैयारी बढ़ाई है. अधिकारियों ने लोगों से नदी के किनारे न जाने की अपील की है.
शारदा बैराज पर बढ़ाई गई निगरानी
चंपावत के टनकपुर में शारदा बैराज को संवेदनशील स्थानों में शामिल करते हुए SDRF की टीम लगातार निगरानी कर रही है. टीम शारदा घाट, बैराज और आसपास के निचले इलाकों में गश्त कर रही है.
अधिकारियों के मुताबिक, टीम का फोकस नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव और संभावित जोखिमों पर है. स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित विभागों के साथ coordination बनाए रखते हुए स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
नेपाल में आई फ्लैश फ्लड के बाद सीमावर्ती भारतीय इलाकों में ऐसी सतर्कता इसलिए बढ़ाई गई है ताकि नदी के जलस्तर में अचानक बदलाव की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित किया जा सके.
SDRF को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया
उत्तराखंड में SDRF की टनकपुर पोस्ट को हाई अलर्ट पर रखा गया है. टीम लगातार sensitive riverside locations में patrol कर रही है.
शारदा नदी के किनारे रहने और काम करने वाले लोगों को भी सावधान रहने तथा नदी के पास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की सलाह दी गई है.
यह कार्रवाई तत्काल एहतियाती तैयारी के तौर पर की जा रही है. उपलब्ध रिपोर्टों में फिलहाल यह नहीं कहा गया है कि नेपाल की बाढ़ के कारण टनकपुर में कोई बड़ा नुकसान हुआ है.
जलस्तर पर लगातार नजर
प्रशासन का मुख्य फोकस शारदा नदी के water level की लगातार monitoring पर है. नेपाल की ओर से आने वाले संभावित पानी के प्रभाव को देखते हुए बैराज और downstream areas में निगरानी बढ़ाई गई है.
SDRF टीम शारदा घाट, बैराज और आसपास के low-lying areas में स्थिति का जायजा ले रही है. किसी भी संभावित बदलाव की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और दूसरे संबंधित विभागों के साथ समन्वय के जरिए कार्रवाई की जाएगी.
लोगों से नदी किनारे नहीं जाने की अपील
प्रशासन और SDRF ने लोगों से शारदा नदी के किनारे जाने से बचने की अपील की है. खासकर संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है.
ऐसी परिस्थितियों में नदी का जलस्तर तेजी से बदल सकता है. इसलिए प्रशासन की ओर से जारी warnings और safety instructions का पालन करना जरूरी है.
सभी संबंधित विभागों को समन्वय के निर्देश
आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने सिंचाई, राजस्व, पुलिस और disaster management से जुड़े विभागों को आपसी coordination के साथ स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं.
इसका उद्देश्य किसी भी संभावित आपात स्थिति में अलग-अलग विभागों के बीच communication और response को तेज रखना है. टनकपुर क्षेत्र में SDRF की मौजूदगी भी इसी preparedness का हिस्सा है.
नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बढ़ी चिंता
26 अगस्त को नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. शुरुआती तौर पर बाढ़ को लेकर कई संभावनाएं सामने आई थीं, जबकि बाद की रिपोर्टों में upstream ice-rock या glacier-related event को संभावित trigger बताया गया. नेपाल में राहत और search-and-rescue operation जारी है.
भोटेकोशी और आगे त्रिशूली नदी तंत्र में बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ने के कारण नेपाल के कई अन्य इलाकों में भी अलर्ट जारी किए गए हैं. अंतरराष्ट्रीय आपदा विशेषज्ञों ने भी downstream क्षेत्रों में संभावित प्रभाव को लेकर monitoring बढ़ाने की जरूरत बताई है.
नेपाल में फंसे उत्तराखंड के लोगों के लिए हेल्पलाइन
राज्य सरकार ने नेपाल में फंसे उत्तराखंड के लोगों और उनके परिवारों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संपर्क के लिए 0135-2710334, 35 और टोल फ्री 1070 नंबर दिए गए हैं.
परिवार इन नंबरों के जरिए नेपाल में मौजूद अपने परिजनों से संबंधित जानकारी और सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं.
अभी स्थिति पर प्रशासन की नजर
उत्तराखंड में फिलहाल मुख्य जोर किसी संभावित खतरे से पहले precautionary preparedness पर है. टनकपुर में शारदा बैराज और नदी किनारे के इलाकों में SDRF की निगरानी जारी है और लोगों से सावधानी बरतने को कहा गया है.
नेपाल में जारी बचाव अभियान और वहां के नदी जलस्तर में होने वाले बदलाव को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है. आने वाले समय में जलस्तर या स्थानीय परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होने पर प्रशासन की ओर से आगे के निर्देश जारी किए जा सकते हैं.


