Weather Update 27 August 2026: देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 26 अगस्त 2026 को जारी दोपहर के ऑल इंडिया वेदर समरी एंड फोरकास्ट बुलेटिन के मुताबिक 27 अगस्त को कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना है. अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल-माहे, मध्य प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम-त्रिपुरा, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है.
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27 अगस्त को कहां-कहां भारी बारिश का अलर्ट
IMD के पूर्वानुमान में 27 अगस्त के लिए कई राज्यों को भारी बारिश वाले क्षेत्रों में रखा गया है. खास तौर पर पूर्वोत्तर राज्यों, पूर्वी भारत, मध्य भारत और उत्तर प्रदेश में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है.
| क्षेत्र/राज्य | 27 अगस्त का पूर्वानुमान |
|---|---|
| अरुणाचल प्रदेश | भारी बारिश की संभावना |
| असम और मेघालय | भारी बारिश की संभावना |
| बिहार | भारी बारिश की संभावना |
| छत्तीसगढ़ | भारी बारिश की संभावना |
| झारखंड | भारी बारिश की संभावना |
| केरल और माहे | भारी बारिश की संभावना |
| मध्य प्रदेश | भारी बारिश की संभावना |
| नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा | भारी बारिश की संभावना |
| ओडिशा | भारी बारिश की संभावना |
| उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम | भारी बारिश की संभावना |
| उत्तर प्रदेश | भारी बारिश की संभावना |
यह चेतावनी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना के लिए है. इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे राज्य में एक जैसी बारिश होगी.
इन जिलों पर खास नजर, फ्लैश फ्लड का जोखिम
IMD ने 27 अगस्त को अगले 24 घंटे के लिए कुछ इलाकों में लो से मॉडरेट फ्लैश फ्लड रिस्क भी बताया है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगरा, अलीगढ़, औरैया, बदायूं, एटा, फिरोजाबाद, हमीरपुर, झांसी, कासगंज, मैनपुरी, मथुरा और शाहजहांपुर जिले शामिल हैं.
पूर्वी राजस्थान में भरतपुर, धौलपुर और करौली में भी फ्लैश फ्लड का जोखिम बताया गया है. पश्चिमी मध्य प्रदेश में भिंड, दतिया, ग्वालियर, मुरैना और शिवपुरी पर विशेष नजर रखने की जरूरत है. IMD के मुताबिक पूरी तरह संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में बारिश के कारण पानी का बहाव और जलभराव हो सकता है.
आंधी और बिजली गिरने का भी खतरा
27 अगस्त को बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का असर भी देखने को मिल सकता है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से थंडरस्क्वॉल की संभावना है.
आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं के साथ गरज और बिजली चमक सकती है. बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल-सिक्किम में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाओं के साथ आंधी-तूफान की संभावना है. पूर्वोत्तर राज्यों, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और उत्तराखंड में भी बिजली चमकने और गरज के साथ बारिश की स्थिति बन सकती है.
मौसम बदलने की वजह क्या है
IMD के अनुसार 26 अगस्त को दक्षिण उत्तर प्रदेश और उससे सटे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र दक्षिण उत्तर प्रदेश की ओर स्थित था और इसके साथ चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ था.
मानसून ट्रफ जम्मू, देहरादून, शाहजहांपुर, दक्षिण उत्तर प्रदेश और उससे सटे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थित निम्न दबाव क्षेत्र, रांची और दीघा से होते हुए उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक जा रही थी. इसके अलावा दक्षिण उत्तर प्रदेश और उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश से उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक एक ट्रफ भी बनी हुई थी. इन मौसमी प्रणालियों का असर मध्य और पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा सकता है.
अगले दिनों में भी जारी रह सकता है बारिश का दौर
27 अगस्त के बाद भी कई इलाकों में मानसूनी गतिविधियां बनी रहने का अनुमान है. 28 अगस्त को पूर्वोत्तर राज्यों, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में भारी बारिश की संभावना है.
29 अगस्त को ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है. 30 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम-त्रिपुरा और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है.
बारिश का असर कहां पड़ सकता है
तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है. कुछ स्थानों पर सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है. भारी बारिश के दौरान दृश्यता कम होने की भी संभावना रहती है.
तेज हवा और बारिश से पेड़ों की शाखाएं टूटने, कमजोर पेड़ों के गिरने तथा कच्चे मकानों, दीवारों और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. खड़ी फसलों और बागवानी फसलों पर भी असर पड़ सकता है. IMD ने स्थानीय भूस्खलन, मलबा खिसकने, जलभराव और निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका भी जताई है.
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए
बारिश या आंधी के दौरान मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखें और स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित स्थान की ओर जाएं. बिजली चमकने के दौरान पेड़ के नीचे खड़े न हों. खुले मैदान, जलाशय और बिजली के सुचालक सामान से दूरी बनाए रखें.
बिजली गिरने की आशंका हो तो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग कर दें और पानी में रहने या उसके आसपास जाने से बचें. तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना भी बेहतर है, खासकर उन इलाकों में जहां जलभराव या फ्लैश फ्लड का जोखिम बताया गया है.
किसानों के लिए भी जरूरी सलाह
भारी बारिश वाले इलाकों में खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने की जरूरत है. IMD ने पश्चिमी मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में खेतों में जलभराव रोकने की सलाह दी है.
बारिश के दौरान खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों को टालना बेहतर है. सब्जियों और बागवानी फसलों को तेज हवा से बचाने के लिए सहारा देने की सलाह भी दी गई है. पशुओं को भारी बारिश के दौरान शेड में रखने और चारा सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह है.
स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग.
FAQ
1. 27 अगस्त को सबसे ज्यादा बारिश किन राज्यों में हो सकती है?
IMD ने अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है.
2. क्या 27 अगस्त को बाढ़ का खतरा भी है?
कुछ इलाकों में फ्लैश फ्लड का जोखिम है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों, पूर्वी राजस्थान के 3 जिलों और पश्चिमी मध्य प्रदेश के 5 जिलों को अगले 24 घंटे के फ्लैश फ्लड आउटलुक में शामिल किया गया है.
3. क्या बारिश के साथ बिजली भी गिर सकती है?
हां. कई राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है. ऐसे समय खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए.
4. क्या बारिश का असर खेती पर भी पड़ेगा?
भारी बारिश से खेतों में पानी भरने, फसलों के गिरने और जड़ों को नुकसान का खतरा हो सकता है. इसलिए जल निकासी बनाए रखना और बारिश के दौरान अनावश्यक कृषि गतिविधियां रोकना जरूरी है.
5. मौसम खराब होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
स्थानीय मौसम चेतावनी पर नजर रखें, सुरक्षित स्थान पर रहें और बिजली-तूफान के समय पेड़, खुले मैदान और जलस्रोतों से दूर रहें. जिन क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड का जोखिम है, वहां निचले इलाकों में जाने से बचना खास तौर पर जरूरी है.


