शिमला, 27 अगस्त 2026: हिमाचल प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की सरकार की कथित तैयारी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर इस मुद्दे को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने लॉटरी शुरू करने की तैयारी का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि करीब 26 साल पहले जिस व्यवस्था को सामाजिक दुष्परिणामों को देखते हुए बंद किया गया था, उसे फिर से शुरू करने की जरूरत पर सरकार को जवाब देना चाहिए.
डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि 26 साल बाद ऐसी कौन-सी परिस्थितियां पैदा हो गई हैं, जिनके चलते प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था वापस लाने की तैयारी की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि यह कदम केवल राजस्व जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर समाज और खासकर युवाओं की सोच पर भी पड़ सकता है.
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26 साल बाद लॉटरी व्यवस्था लौटाने पर सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में करीब 26 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने लॉटरी व्यवस्था को बंद करने का फैसला लिया था. उनका कहना है कि उस समय इसके सामाजिक दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया था.
अब डॉ. बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से सवाल किया है कि आखिर ऐसी क्या जरूरत सामने आई है कि सरकार फिर से लॉटरी शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
उन्होंने सरकार से इस फैसले के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभावों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की है.
राजस्व से ज्यादा सामाजिक असर की चिंता
डॉ. बिंदल ने कहा कि लॉटरी को सिर्फ सरकार के लिए revenue generation के माध्यम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, इसके सामाजिक प्रभाव और खासकर युवा पीढ़ी पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
उन्होंने तर्क दिया कि स्कूल से निकलने वाला कोई बच्चा यदि लॉटरी के स्टॉल या उसके प्रचार को देखता है, तो उसके मन में बिना मेहनत के जल्दी अमीर बनने की इच्छा पैदा हो सकती है. बिंदल के अनुसार, ऐसी मानसिकता धीरे-धीरे व्यक्ति को मेहनत और सही रास्ते से दूर कर सकती है.
हालांकि, ये दावे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की ओर से व्यक्त की गई राजनीतिक और सामाजिक चिंता हैं. सरकार की ओर से इस विषय पर क्या आधिकारिक तर्क दिया गया है, यह इस बयान में स्पष्ट नहीं किया गया है.
70 लाख लोगों के भविष्य का मुद्दा उठाया
डॉ. बिंदल ने कहा कि यदि सरकार कुछ करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के लिए लॉटरी व्यवस्था वापस लाने की तैयारी कर रही है, तो यह चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की आबादी करीब 70 लाख है और इतनी बड़ी आबादी के सामाजिक जीवन पर किसी भी संभावित नकारात्मक प्रभाव को केवल revenue के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने दावा किया कि लॉटरी लोगों में जल्दी और आसानी से पैसा कमाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकती है. इसी वजह से उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को दोबारा शुरू नहीं करने की अपील की.
सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इस मुद्दे को राज्य की आर्थिक स्थिति से भी जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना है, तो इसके लिए उद्योग, पर्यटन, रोजगार, निवेश और अन्य economic activities को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.
उनके मुताबिक, सरकार को अपनी आर्थिक चुनौतियों की भरपाई के लिए लॉटरी टिकट बेचने का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए. उन्होंने इसे प्रदेश की जनता के हितों के खिलाफ बताया.
डॉ. बिंदल ने कहा कि राज्य सरकार का दायित्व सिर्फ सरकारी खजाने में राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा करना भी है.
युवाओं पर असर को लेकर भाजपा का तर्क
बिंदल ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि लॉटरी जैसी व्यवस्था युवाओं के बीच बिना मेहनत के धन पाने की सोच को बढ़ावा दे सकती है.
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक शिक्षित, मेहनतकश और विकासशील समाज है और ऐसे समाज को लॉटरी, जुए तथा आसान पैसे की प्रवृत्ति की ओर ले जाना उचित नहीं होगा.
यहां भाजपा का तर्क मुख्य रूप से संभावित सामाजिक प्रभावों पर आधारित है. इसे किसी स्थापित या सिद्ध परिणाम के रूप में नहीं बल्कि पार्टी की राजनीतिक आपत्ति के तौर पर देखा जाना चाहिए.
सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
डॉ. बिंदल ने प्रदेश सरकार से कथित लॉटरी योजना पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार को होने वाली कुछ करोड़ रुपये की संभावित आमदनी की तुलना में इसके सामाजिक प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकते हैं.
उन्होंने साफ कहा कि भाजपा हिमाचल प्रदेश में लॉटरी दोबारा शुरू करने के किसी भी फैसले का विरोध करेगी. पार्टी ने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है.
कांग्रेस सरकार पर आगे भी हमले के संकेत
लॉटरी का मुद्दा सामने आने के बाद भाजपा ने इसे प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों और सामाजिक प्राथमिकताओं से जोड़कर उठाया है. बिंदल का कहना है कि राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए ऐसे रास्तों पर ध्यान देना चाहिए जिनसे रोजगार और निवेश बढ़े तथा आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिले.
फिलहाल इस मामले में उपलब्ध सामग्री में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया और उनकी मांगें सामने आई हैं. सरकार की ओर से लॉटरी शुरू करने की योजना, उसके स्वरूप, संभावित राजस्व और आधिकारिक निर्णय पर कोई विस्तृत पक्ष इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है.
इसलिए फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि हिमाचल में लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की कथित तैयारी को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और सरकार से इस मुद्दे पर अपना फैसला स्पष्ट करने तथा प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की है.


